
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : राजनीतिक गलियारों में गुरुवार को उस वक्त हलचल मची, जब जनता के हक की लड़ाई लड़ते हुए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के पार्षद हेमंत गेहलोत बागी तेवर अपनाकर सड़क पर बहते गंदे सीवरेज के बीच धरने पर बैठ गए। मामला वार्ड 2 का है, जहां के नागरिक लंबे समय से पीने को गंदा पानी मिलने और सड़क पर बहते सीवरेज की समस्या से परेशान हैं।
पिपलीनाका-भैरवगढ़ मुख्य मार्ग पर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चले प्रदर्शन में पार्षद ने जनता की इस भीषण पीड़ा को उजागर करने के लिए मीडिया के सामने दो बोतलों में वह दूषित पानी दिखाया, जो नगर निगम द्वारा सीधे शहरवासियों के घरों में पीने के लिए सप्लाई किया जा रहा है। इस जहरीले पानी को पीकर आमजन गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। अफसरों को शिकायत की, वे मौका भी देख गए मगर समस्या का समाधान नहीं किया। इसलिए मुझे रहवासियों संग धरने पर बैठना पड़ा।
धरने की खबर मिलते ही निगम के प्रशासनिक अमले में भगदड़ मच गई। मौके पर स्थिति संभालने पहुंचे अपर आयुक्त पवन कुमार सिंह को पार्षद और रहवासियों के भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा। पार्षद गेहलोत ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने पीएचई के कार्यपालन यंत्री शिवम दुबे की कार्यप्रणाली पर प्रहार करते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग उठा दी। यही नहीं, अधिकारियों की उदासीनता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि शिवम दुबे और साहिल मेदावाला जैसे जिम्मेदार अधिकारी फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझते।
तीन घंटे तक चले इस उग्र प्रदर्शन और हंगामे के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने समस्या के स्थायी समाधान का लिखित आश्वासन दिया। निगम और संबंधित विभागों के बीच बनी सहमति के अनुसार, क्षेत्र की सड़ती व्यवस्था को सुधारने के लिए सीवरेज की मुख्य पाइपलाइन को पूरी तरह बदला जाएगा।
इसके तहत अब जर्जर लाइनों को हटाकर 600 एमएम साइज के बड़े सीमेंटेड पाइप बिछाए जाएंगे, ताकि गंदे पानी की निकासी सुचारू हो सके और रहवासियों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके। बहरहाल, इस विरोध प्रदर्शन ने स्थानीय प्रशासन और निगम की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है, वहीं सत्ता दल के पार्षद का यह विद्रोही अंदाज शहरभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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