• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • AI बूटकैंप
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • Mutual Funds मास्टरी
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • उज्जैन

बुद्ध पूर्णिमा विशेष : उज्जैन में है सम्राट अशोक का बनवाया गया स्तूप 'वैश्य टेकरी'

350 फीट व्यास और 100 फीट ऊंचा यह स्तूप सांची से भी बड़ा है, 1937-38 में खुदाई के बाद राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक घोषित हुआ, लेकिन विकास नहीं हुआ।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 01 May 2026 10:42:08 AM (IST)Updated Date: Fri, 01 May 2026 10:56:28 AM (IST)
बुद्ध पूर्णिमा विशेष : उज्जैन में है सम्राट अशोक का बनवाया गया स्तूप 'वैश्य टेकरी'
भगवान गौतम बुद्ध के अनुयायियों की आस्था मुख्य केंद्र उपेक्षित- वैश्य टेकरी।

HighLights

  1. सम्राट अशोक ने पत्नी महादेवी की याद में बनवाया था वैश्य टेकरी स्तूप
  2. भारत, चीन, श्रीलंका, जापान और कंबोडिया के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
  3. वैश्य टेकरी के पास में उंडासा तालाब, साइबेरिया से आते हैं प्रवासी पक्षी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। आज 1 मई को जब पूरा विश्व बुद्ध पूर्णिमा मनाने जा रहा है, बौद्ध अनुयायी धम्म वंदना के लिए वैश्य टेकरी पर जुटने जा रहे हैं, तब एक कड़वा सच सामने आता है। उज्जैन की यह धरोहर, जो ऐतिहासिक रूप से सांची से भी बड़ी और महत्वपूर्ण है, आज सरकारी फाइलों और उपेक्षा के बीच कहीं खो गई है।

इतिहासकारों के अनुसार, सम्राट अशोक ने अपनी पत्नी (महादेवी) की याद में भारत भर में 84 हजार स्तूप बनवाए थे, जिनमें उज्जैन की 'वैश्य टेकरी' भी शामिल है। इसका व्यास 350 फीट और ऊंचाई 100 फीट है। यह न केवल भारत बल्कि चीन, श्रीलंका, जापान और कंबोडिया जैसे देशों के श्रद्धालुओं के लिए भी गहरी आस्था का केंद्र है।


सन् 1937-38 की खोदाई में यहां ऐतिहासिक अवशेष मिले थे, जिसके बाद इसे ‘राष्ट्रीय संरक्षित स्मारक’ का दर्जा तो मिला, लेकिन विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। उज्जैन में ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के नवविस्तारित क्षेत्र ‘महाकाल महालोक’ बनने के बाद पर्यटकों की बाढ़ आई हुई है और 2028 का सिंहस्थ कुंभ भी नजदीक है।

इसके बावजूद, पर्यटन विभाग के पास इस बौद्ध सर्किट के लिए कोई ठोस प्लान नहीं है। पर्यटन विकास निगम के अनुसार, टेकरी के आसपास की अधिकांश भूमि निजी स्वामित्व की है। विभाग का कहना है कि जब तक सरकार भूमि उपलब्ध नहीं कराती, तब तक कोई बड़ी कार्ययोजना बनाना मुश्किल है।

पर्यटन की अपार संभावनाएं : सिर्फ स्तूप ही नहीं, और भी बहुत कुछ है यहां

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस क्षेत्र को विकसित करे, तो यह अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है। पास ही उंडासा तालाब है, जहां हर साल साइबेरिया से प्रवासी पक्षी आते हैं। यदि पहुंच मार्ग सुधर जाए, तो महाकाल आने वाले लाखों श्रद्धालु इस बौद्ध विरासत को भी करीब से देख सकेंगे।

शुक्रवार को बुद्ध पूर्णिमा पर जब हजारों लोग यहां शांति और प्रार्थना के लिए एकत्रित होंगे, तब सवाल यही उठता है कि क्या 2300 साल पुरानी इस विरासत को केवल एक ‘संरक्षित स्मारक’ का बोर्ड लगाकर छोड़ देना काफी है। उज्जैन को धार्मिक पर्यटन का ग्लोबल हब बनाने का सपना तब तक अधूरा है, जब तक ‘वैश्य टेकरी’ को उसका खोया हुआ गौरव नहीं मिल जाता।

यह भी पढ़ें : उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास महादेव ने दिए दर्शन, खोदाई के दौरान मिला शिवलिंग; कर्मचारियों ने की पूजा