Chamunda Mata Mandir Gajnikhedi: रुनिजा (उज्जैन)। धर्मधानी उज्जैन से 65 किमी और रतलाम से 40 किमी दूर बड़नगर तहसील का गांव है गजनीखेड़ी। यहां चंड-मुंड का संहार करने वाली मां चामुंडा का ऐतिहासिक मंदिर। माना जाता है कि यहां माता की प्रतिमा दिन में तीन रूप धारण करती है।

ऐतिहासिक महत्व

यह पूर्वाभिमुखी मंदिर भूमिज शैली का उत्कृष्ट नमूना है। अनुमानत: यह छठी या सातवीं शताब्दी का गुप्तकालीन मंदिर है, जो ढह गया या मुस्लिम राजाओं द्वारा ढहाया गया। गर्भ गृह की प्रमुख मूर्ति चामुंडा माता की है। बाजू में स्कंध माता व प्रति स्कंध माता की मूर्ति है। दूसरी तरफ दुर्लभ शेषशायी गणेशजी की मूर्ति है। प्रसिद्ध पुरातत्वविद वीएस वाकणकर के अनुसार विश्व में यह अत्यंत दुर्लभ मूर्ति है। इस प्रकार की एक मूर्ति काठमांडू (नेपाल) में है। मंडप के दाहिनी ओर बाह्य भित्ति पर 11वीं सदी का पांच पंक्ति का नागरीय लिपि में एक लेख उत्कीर्ण है। मंदिर के आंगन में दो छतरियां व एक कुंड स्थित है। यह स्थान निमाड़ सहित इंदौर क्षेत्र के अरझरे व लाड़ परिवार के सैकड़ों परिवार की विशेष आस्था का केंद्र है। यह मंदिर उनकी कुलदेवी का स्थान माना जाता है। शारदीय नवरात्र में हजारों यात्री निमाड़ क्षेत्र से यहां आते है तथा तीन दिन तक रुककर पूजन-अर्चन करते हैं।

किंवदंतियां

इस मंदिर के बारे मे अनेक किंवदंतियां प्रचलित है। प्रथम यह कि मां दिन में तीन रूप धारण करती है। प्रात: नन्हीं बालिका का स्वरूप दिखई देता है तो दोपहर में युवा व संध्या को वृद्धावस्था में दिखाई देती है। इसे नियमित आने वाले श्रद्धालु महसूस भी करते हैं। कहा जाता है कि महमूद गजनवी ने जब धार पर आक्रमण किया था तब इस मंदिर को तोड़ा था। जिसके अवशेष आज भी प्रांगण में बिखरे पड़े हैं। महमूद गजनवी की फ़ौज लंबे समय तक यहां रुकी थी। इस वजह से इस स्थान का नाम गजनीखेड़ी पड़ा। यहां फौज का पड़ाव नाम से एक विशाल मैदान था। जो आज भी सीमित रूप में स्थित है।

विकास कार्य भी हुए

वर्तमान में यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। स्थानीय लोगों ने इसके विकास के लिए एक संस्था का गठन किया है, जो तकरीबन 15 बरस से कार्य कर रही है। संस्था ने 10 हजार वर्ग फ़ीट का एक विशाल डोम बनाया है। बाहर से आने वाले दर्शनार्थियो के लिए भोजन व्यवस्था व बर्तन आदि भी संस्था नाम मात्र के शुल्क पर उपलब्ध करवाती है। अब तो इंदौर-रतलाम व अन्य जगहों से भक्त मन्नत पूर्ण होने पर व पिकनिक के लिए भी यहां कार्यक्रम करने आते हैं।

Posted By: Prashant Pandey

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