
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। फिल्म अभिनेत्री नुसरत भरूचा ने मंगलवार को ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर पहुंचकर भगवान महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। उन्होंने न केवल भगवान को जल अर्पित किया, बल्कि मंदिर परिसर में 'जयकारा' भी लगाया। हालांकि, उनकी यह शिव भक्ति कुछ कट्टरपंथियों को रास नहीं आ रही है। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने नुसरत के मंदिर जाने और दर्शन करने को इस्लाम के विरुद्ध करार दिया है।
मौलाना के विरोध के बीच उज्जैन के साधु-संतों ने नुसरत भरूचा का पुरजोर समर्थन किया है। निर्मोही अखाड़ा के महामंडलेश्वर महंत ज्ञानदासजी महाराज ने कहा कि भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति मूल रूप से सनातनी ही है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि हम 1500 साल पीछे के इतिहास को देखें, तो उस समय केवल सनातन वैदिक हिंदू धर्म ही अस्तित्व में था। महाराज के अनुसार, आज कोई व्यक्ति खुद को किसी भी धर्म का माने, लेकिन उसकी जड़ें सनातनी हैं, और शायद इसी भाव के कारण नुसरत के मन में शिव भक्ति जागी है।
प्रसिद्ध संत डॉ. अवधेशपुरी महाराज ने इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे संवैधानिक अधिकारों से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा अनुसार धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। नुसरत भरूचा का महाकाल दर्शन करने आना उनका निजी और संवैधानिक अधिकार है। महाराज ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि कोई उनके इस कदम का विरोध करता है, तो यह सीधे तौर पर भारतीय संविधान का अपमान है।
यह भी पढ़ें- मंदसौर में सनसनीखेज घटना, एजेंसी के संचालक व उनकी पत्नी की हत्या, हमलावर ने खुद को भी मारी गोली