
धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन : उज्जैन में श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से सीधे महाकालेश्वर मंदिर तक हवाई रास्ते से पहुंचाने वाली महत्वाकांक्षी ‘महाकाल रोप-वे परियोजना’ एक बार फिर आगे बढ़ी है।
दो साल में मात्र 2 प्रतिशत काम करने वाली ओडिशा की एमएस इंफ्राइंजीनियर्स कंपनी ठेका निरस्त करने के बाद नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) ने काम पुन: प्रारंभ कराने के लिए प्रोजेक्ट की लागत 69 करोड़ रुपये बढ़ाकर 258.37 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी कर दिया है।
यानी समय पर काम न कराने से सरकार की जेब पर 68 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात ये भी है कि प्रोजेक्ट समय पर पूरा करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी पर सरकार अब भी मेहरबान है। क्योंकि उनके खिलाफ कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई है। इच्छुक निविदाकारों से 28 अक्टूबर 2026 तक निविदा प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
मालूम हो कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा 24 फरवरी 2022 को महाकाल रोप-वे परियोजना की घोषणा की थी। तब इसके लिए 188 करोड़ 95 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके बाद वर्ष 2024 में ओडिशा की मेसर्स इंफ्राइंजीनियर्स कंपनी को निर्माण, संचालन और रखरखाव का जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन दो साल में कंपनी 2 फीसदी काम भी पूरा नहीं कर सकी।
इसका मुख्य कारण ठेकेदार फर्म और विभागीय अधिकारियों के बीच तालमेल और कागजी खानापूर्ती समय पर न होना सामने आई। बहरहाल इसी साल जून माह में ठेका निरस्त करने के बाद अब प्रोजेक्ट नई एजेंसी तय कर आगे बढ़ाने के लिए दोबारा टेंडर काल किया गया है। इस बार भी रोप-वे निर्माण की समय सीमा दो वर्ष निर्धारित की है। वर्ष 2028 में महाकुंभ सिंहस्थ प्रारंभ होना है।
यानी अगले माह नवंबर में ठेकेदार तय कर कार्य आदेश जारी होता तो भी ये प्रोजेक्ट महाकुंभ से पहले पूरा होना मुश्किल दिखाई देता है। हां, यदि साइट पर दिन-रात काम चलाया जाए तो काम हो भी सकता मगर ये काफी चुनौतीपूर्ण होगा। क्योंकि मामला महाकाल क्षेत्र और रेलवे स्टेशन से जुड़ा है और उज्जैन वो शहर है जहां 12 महीने तीज-त्योहार भव्यता से मनाए जाते हैं और हर दिन लाखों पर्यटक यहां महाकाल दर्शन करने आते।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पिछली बार टेंडर खुलने के लगभग एक साल बाद तक धरातल पर काम ही शुरू नहीं हो सका था। पूरी प्रक्रिया केवल कागजी खानापूर्ति में ही बीत गई। निर्माण एजेंसी द्वारा करीब 10 नोटिस जारी किए जाने के बावजूद ठेकेदार ने काम से हाथ पीछे खींच लिए। गंभीर लापरवाही और परियोजना में विलंब के बावजूद किसी भी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है।
मौके पर स्थिति यह रही कि इंदौर गेट रेलवे स्टेशन और माधवगंज स्कूल के पास बोर्डिंग स्टेशन के लिए डेढ़ साल पहले खोदे गए गड्ढे आज भी जस के तस पड़े हैं। 13 प्रस्तावित टावर लोकेशनों में से केवल 3 स्थानों पर ही सीमित खुदाई हुई थी। काम ठप होने और ठेकेदार द्वारा असमर्थता जताने के बाद जून 2026 में ठेका निरस्त कर अर्नेस्ट मनी राजसात करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था।
नए टेंडर के अनुसार, रोप-वे की लंबाई को 1.76 किलोमीटर से बढ़ाकर 1.9 किलोमीटर (1900 मीटर) निर्धारित किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए ट्रांजित टाइम 5 से 7 मिनट का तय किया गया है। परियोजना के तहत 10 यात्री क्षमता वाले गोंडोला कोच, 3 बोर्डिंग स्टेशन, पार्किंग, प्रतीक्षालय और फूड जोन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। सिंहस्थ 2028 से पहले श्रद्धालुओं के लिए इस सुविधा का शुरू होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।