
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। पितृपक्ष में पितरों की पूजा और श्राद्धकर्म में शुद्धता का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक परंपरा में पितृकर्म से पहले पूजा स्थल को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने पर जोर दिया गया है। धर्मनगरी उज्जैन के प्राचीन सिद्धवट तीर्थ पर इन दिनों तस्वीर इसके ठीक उलट है। यह घाट पूरी तरह उपेक्षित नजर आ रहा है। हर तरफ कबाड़ व कूड़े करकट के ढेर लगे हैं। भक्तों की सुविधा के लिए बनाए गए धर्मशाला भवन का दो दशक बाद लाभ नहीं मिल पाया है।
सिद्धवट तीर्थ पहुंचकर जब आप आसपास नजरें दौड़ाएंगे तो जगह-जगह पुराना सामान, तिरपाल, पाइप, सरिये और अन्य कबाड़ बिखरा दिखाई देता है। मुख्य मंदिर के पीछे भी लंबे समय से पड़ा सामान हटाया नहीं गया है। कई हिस्सों में गंदगी और कचरा जमा है।
प्याऊ के आसपास गंदगी पसरी है, भीतर कक्ष में बोतलें, ईंट, रेती और अन्य निर्माण सामग्री का कबाड़ भरा पड़ा है। गंदगी के कारण पानी पीना तो दूर यहां खड़े होने में परेशानी होती है। मुख्य द्वार के सामने अवैध पार्किंग व आसपास की दुकानों का अतिक्रमण भी परेशानी का सबब बना हुआ है।
यह भी पढ़ें- मां पार्वती ने किया था इस वटवृक्ष का रोपण, तर्पण से मिलती है समृद्धि
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब 22 वर्ष पहले सन 2004 में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने यहां धर्मशाला का निर्माण कराया था। आज इस भवन पर ताला लगा है। अंदर टीन, एंगल और अन्य सामान का कबाड़ भरा पड़ा है। वर्षों से उपयोग में नहीं आ रही धर्मशाला श्राद्ध पक्ष में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी हो सकती थी, लेकिन वर्तमान में यह खुद उपेक्षित नजर आ रही है।
सिद्धवट मंदिर के समीप प्राचीन द्वार शाखा का संग्रह है। इनमें राजा भोज काल की कला परंपरा की झलक मिलती है। द्वार शाखा पर भगवान विष्णु के दशावतार की सुंदर प्रतिमाएं उत्कीर्ण हैं। पितृकर्म में भगवान विष्णु की साक्षी का धार्मिक महत्व होने से इन मूर्तियों के दर्शन विशेष हैं। लेकिन इन प्राचीन धरोहरों के आसपास भी अव्यवस्था का आलम है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार शिप्रा का सिद्धवट घाट सिद्धवट (वटवृक्ष), प्रेत शिला व शक्ति भेद तीर्थ के कारण धार्मिक दृष्टिकोण से सप्ततीर्थों में विशिष्ट स्थान रखता है। इस स्थान पर पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान करने से से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए महालय श्राद्धपक्ष में देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां पितृ कर्म करने आते हैं।
यह भी पढ़ें- वीडियोः सिद्धवट में होता है पिंड दान, 18 पीढ़ियों तक की जानकारी मिलती है
सिद्धवट घाट पर तीर्थ प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समुचित इंतजाम किए जा रहे हैं। परिसर में विकास प्राधिकरण, स्मार्ट सिटी, नगर निगम आदि प्रमुख विभागों की भी भूमिका है। महालय श्राद्ध पक्ष में व्यवस्था के लिए सभी संबंधित विभागों को पत्र लिख दिया गया है। - मूलचंद जाटवा, प्रशासक सिद्धवट तीर्थ परिसर