
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूप के रूप में चर्चित वैश्य टेकरी के उन्नयन की दिशा में प्रदेश सरकार ने पहला कदम बढ़ा दिया है। शुक्रवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) नई दिल्ली, भोपाल, इंदौर तथा स्थानीय पुराविदों के साथ मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्यौगिकी संस्थान (मैनिट) भोपाल के विशेषज्ञों ने जीपीआर (ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार) तकनीक से स्कैनिंग की थी। सूत्र बताते हैं अब प्राप्त आंकड़ों के अधार पर मैनिट के विशेषज्ञ रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेंगे। इसके बाद आगे की योजना बनाई जाएगी।
बताया जाता है स्कैनिंग के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि टेकरी के भीतर जमीन के नीचे कहां-कहां पर दीवार, सीढ़ियां, धातु की संरचना, खाली स्थान अथवा अन्य पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं। जीपीआर से प्राप्त आंकड़े अब विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण आधार होंगे।
मैनिट के विशेषज्ञ इन आंकड़ों का तकनीकी विश्लेषण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद यह रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि उत्खनन टेकरी के किस हिस्से से और किस वैज्ञानिक तरीके से शुरू किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार रिपोर्ट तैयार करने तथा आगे की प्रक्रिया के दौरान जब भी आवश्यकता महसूस होगी।
टेकरी के आसपास जीपीआर तकनीक से स्कैनिंग की जाती रहेगी। पुरातत्व के स्थानीय विद्वान, साहित्यकार व लेखकों ने वैश्य टेकरी के उन्नयन की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए जा प्रयासों की सरहाना की है। क्योंकि 1938-39 के बाद 88 साल तक इस ओर पूर्ववर्ती किसी भी सरकार ने भी ध्यान नहीं दिया।
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