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महाकाल की नगरी उज्जैन में प्रवेश करते ही दिखेगा सनातन का गौरव, बनेंगे 9 भव्य द्वार

श्रद्धालु उज्जैन में प्रवेश करेंगे, तो भव्य द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 11 Feb 2026 10:14:12 AM (IST)Updated Date: Wed, 11 Feb 2026 10:24:42 AM (IST)
महाकाल की नगरी उज्जैन में प्रवेश करते ही दिखेगा सनातन का गौरव, बनेंगे 9 भव्य द्वार
विक्रमादित्य द्वार, अमृत द्वार और डमरू द्वार का प्रस्तावित एलिवेशन।

HighLights

  1. उज्जैन में 18 महीनों में नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया
  2. एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी
  3. सभी पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, रात में जगमगाएंगे ये द्वार

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी ‘उज्जैन’, अपने प्रवेश मार्गों पर भव्य और प्रतीकात्मक पहचान गढ़ने जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) ने शहर के नए प्रमुख मार्गों पर 92.25 करोड़ लाख रुपये से नौ प्रवेश द्वार बनाने जा रहा है।

यह परियोजना केवल शहरी सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उज्जैन की हजारों वर्षों पुरानी सनातन परंपरा, खगोल–कालगणना, सिंहस्थ संस्कृति और राजकीय गौरव को मूर्त रूप देना है। जब कोई श्रद्धालु, पर्यटक या आगंतुक उज्जैन की सीमा में प्रवेश करेगा, तो ये द्वार उसे यह एहसास कराएंगे कि वह किसी साधारण नगर में नहीं, बल्कि काल, धर्म और मोक्ष की राजधानी में कदम रख रहा है।


योजना के तहत इंदौर रोड, देवास रोड, आगर रोड, मक्सी रोड, बड़नगर रोड और सिंहस्थ से जुड़े प्रमुख मार्गों सहित विभिन्न दिशाओं से शहर में प्रवेश करने वाले मार्गों पर ये द्वार निर्मित किए जाएंगे। प्रवेश द्वारों के आसपास सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, मीडियन, हरित पट्टी और ट्रैफिक सुव्यवस्था का भी समग्र विकास किया जाएगा, ताकि शहर की पहली छवि भव्य, सुव्यवस्थित और गरिमामयी बने।

स्थापत्य में दिखेगा काल और संस्कृति का संवाद

नौ प्रवेश द्वारों का डिजाइन पारंपरिक भारतीय स्थापत्य और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक का संतुलित समन्वय होगा। निर्माण में बंसी पहाड़पुर के गुलाबी–सफेद पत्थर और जैसलमेर के पीले पत्थर का उपयोग किया जाएगा। द्वारों पर 10 से 50 मिमी तक की गहरी 3-डी नक्काशी की जाएगी, जिसमें पौराणिक प्रसंग, धार्मिक प्रतीक, शेर, हाथी, मानव आकृतियां और सांस्कृतिक चिन्ह उकेरे जाएंगे।

रात्रिकालीन दृश्य प्रभाव के लिए आरजीबीडब्ल्यू लाइटिंग, एलईडी डाउनलाइटर और डीएमएक्स कंट्रोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सभी द्वारों पर सोलर सिस्टम भी लगाए जाएंगे, जिससे ये द्वार रात में भी उज्जैन की भव्य पहचान बनेंगे।

यूडीए के अनुसार सभी स्वीकृतियों के बाद 18 महीनों में नौ प्रवेश द्वारों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद संबंधित एजेंसी को पांच वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

जानिये, किस द्वार के लिए कितना बजट

  • अमृत द्वार 9.68 करोड़
  • पांचजन्य द्वार 12.50 करोड़
  • गज द्वार 8.51 करोड़
  • कालगणना द्वार 11.07 करोड़
  • उज्जैनी द्वार 6.48 करोड़
  • सिंहस्थ द्वार 6.48 करोड़
  • त्रिशुल द्वार 10.65 करोड़
  • विक्रमादित्य द्वार 13.58 करोड़
  • डमरू द्वार 13.29 करोड़

सदियों पुरानी परंपरा को मिलेगा नया स्वरूप

इतिहासकारों के अनुसार उज्जैन में प्रवेश द्वारों की परंपरा वर्षों पुरानी रही है। प्राचीन काल में नगर की सीमाओं पर बने द्वार न केवल सुरक्षा के लिए होते थे, बल्कि नगर की पहचान, सांस्कृतिक गौरव और शक्ति के प्रतीक भी माने जाते थे। यूडीए की यह योजना उसी परंपरा को आधुनिक शहरी जरूरतों के अनुरूप पुनर्जीवित करने का प्रयास है।

नामों की साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता

  • अमृत द्वार : समुद्र मंथन से निकले अमृत का प्रतीक, उज्जैन को मोक्ष और अमरत्व की भूमि के रूप में दर्शाता है।
  • पंचजन्य द्वार : भगवान कृष्ण के शंख ‘पंचजन्य’ से प्रेरित, धर्म और विजय का प्रतीक।
  • गज द्वार : भारतीय परंपरा में हाथी ऐश्वर्य, शक्ति और मंगल का संकेतक।
  • कालगणना द्वार : उज्जैन की विश्वविख्यात कालगणना और खगोल परंपरा की पहचान।
  • उज्जैनी द्वार : नगर की सांस्कृतिक आत्मा और ऐतिहासिक अस्मिता का प्रतीक।
  • सिंहस्थ द्वार : विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ के माध्यम से उज्जैन की वैश्विक धार्मिक पहचान को दर्शाता है।
  • त्रिशूल द्वार : भगवान महाकाल के त्रिशूल का प्रतीक, सृजन–संरक्षण–संहार का दर्शन।
  • विक्रमादित्य द्वार : सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, शौर्य और उज्जैन की राजकीय परंपरा का प्रतीक।
  • डमरू द्वार : शिव के डमरू से उद्भूत नाद, सृष्टि और समय चक्र का संकेत।

(नोट : इन नौ भव्य प्रवेश द्वारों के साथ उज्जैन न केवल भौतिक रूप से भव्य दिखेगा, बल्कि अपनी हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भी आधुनिक स्वरूप में सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।)

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