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उज्जैन में पेयजल लाइन में मिल रहा अस्पताल के सीवेज का पानी, इंदौर की घटना से भी नहीं लिया सबक

उज्जैन में दूषित पेयजल की यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी कुछ समय पूर्व इंदौर के भागीथपुरा में देखी गई थी, जहां दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली ग...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 25 Feb 2026 12:03:04 PM (IST)Updated Date: Wed, 25 Feb 2026 12:11:27 PM (IST)
उज्जैन में पेयजल लाइन में मिल रहा अस्पताल के सीवेज का पानी, इंदौर की घटना से भी नहीं लिया सबक
क्षीरसागर निवासी वीरेंद्र टेटवाल के घर नगर निगम से प्रदाय पानी।

HighLights

  1. उज्जैन नगर निगम ने हजारों रहवासियों को गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर धकेल दिया
  2. पार्षद ने नईदुनिया को बताया कि 'मेरे वार्ड के लोग 15 दिनों से नर्क जैसी स्थिति में
  3. उज्जैन नगर निगम प्रतिदिन सीवेज को खाली करने की 'खानापूर्ति' कर रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन के क्षीरसागर क्षेत्र में इन दिनों लोगों के घरों में पानी नहीं, बल्कि 'मौत का तरल' बह रहा है। शहर के प्रतिष्ठित चरक अस्पताल की लापरवाही और निगम की उदासीनता ने वार्ड क्रमांक 25 के हजारों रहवासियों को गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर धकेल दिया है। पिछले 15 दिनों से क्षेत्र के नलों में अस्पताल के सीवेज का बदबूदार और दूषित पानी आ रहा है, जिससे स्थानीय लोग बीमार पड़ रहे हैं।

हैरत की बात यह है कि जिस अस्पताल पर लोगों को स्वस्थ करने की जिम्मेदारी है, वही क्षेत्र में संक्रमण फैला रहा है। जानकारी के अनुसार, सिविल अस्पताल का सीवेज चैंबर मेडिसिटी बनाने को डिस्मेंटल किया जा चुका है, और न्यू चरक अस्पताल में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) न होने के कारण गंदा पानी सीधे पेयजल लाइनों में मिल रहा है। नगर निगम प्रतिदिन इस सीवेज को खाली करने की 'खानापूर्ति' तो कर रहा है, लेकिन रिसाव रोकने में पूरी तरह विफल है।


इंदौर की 'भागीथपुरा त्रासदी' से भी नहीं लिया सबक

यह स्थिति ठीक वैसी ही है जैसी कुछ समय पूर्व इंदौर के भागीथपुरा में देखी गई थी, जहां दूषित पानी पीने से कई लोगों की जान चली गई थी। क्षेत्रीय पार्षद डॉ. योगेश्वरी ने इस मुद्दे पर महापौर, स्वास्थ्य अधिकारी और निगमायुक्त को कई बार आगाह किया है, हालांकि हालात में कुछ बदलाव नहीं हो रहा।

पार्षद ने नईदुनिया को बताया कि 'मेरे वार्ड के लोग 15 दिनों से नर्क जैसी स्थिति में हैं। पानी इतना गंदा और बदबूदार है कि हाथ धोना भी मुश्किल है। पीने के लिए बाहर से बोतल बंद पानी खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है।' यही बात क्षीर सागर निवासी वीरेंद्र टेटवाल ने भी कही।

व्यवस्था पर तीखे सवाल

  • जब सीवेज प्लांट नहीं था, तो चैंबर को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के क्यों हटाया गया?
  • जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाला निगम, लोगों को पानी खरीदने पर क्यों मजबूर कर रहा है?
  • क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार कर रहा है?

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