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Ujjain News: सरपंच ने तहसीलदार-पटवारी की मिलीभगत से फर्जी वारिस खड़ा कर करोड़ों रुपये की जमीन बेटे के नाम से खरीदी

उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम जलोदिया में करोड़ों रुपये की करीब 3 बीघा जमीन को फर्जी तरीके से सरपंच के बेटे के नाम करा लिया गया।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 24 Jul 2026 10:16:29 AM (IST)Updated Date: Fri, 24 Jul 2026 10:41:48 AM (IST)
Ujjain News: सरपंच ने तहसीलदार-पटवारी की मिलीभगत से फर्जी वारिस खड़ा कर करोड़ों रुपये की जमीन बेटे के नाम से खरीदी
जमीन के मूल मालिक की मृत्यु करीब 68 वर्ष पहले हो चुकी थी। राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी वारिस प्रमाण पत्र बनाकर पहले मृतक की जाति बदल दी गई।

HighLights

  1. 30 अप्रैल 2026 को मृत्यु प्रमाण पत्र और 7 मई को वारिस प्रमाण पत्र जारी हुआ
  2. 13 मई को पंचायत पत्र-पंचनामा के बाद 20 मई को फौती नामांतरण आदेश हुआ
  3. इसमें मूल रिकॉर्ड में ब्राह्मण दर्ज होने के बावजूद जाति बलई लिख दी गई

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम जलोदिया में करोड़ों रुपये कीमत की करीब तीन बीघा जमीन को कथित तौर पर तहसीलदार-पटवारी की मिलीभगत से सरपंच ने अपने बेटे के नाम करा लिया। आरोप है कि जमीन के मूल मालिक की मृत्यु करीब 68 वर्ष पहले हो चुकी थी। राजस्व रिकॉर्ड में फर्जी वारिस प्रमाण पत्र बनाकर पहले मृतक की जाति बदल दी गई और फिर जमीन का फौती नामांतरण कर रजिस्ट्री तक करा दी गई।

मामले के अनुसार ग्राम जलोदिया में सर्वे नंबर 382, रकबा 0.69 हेक्टेयर भूमि दत्तात्रय पुत्र रघुनाथ जाति ब्राह्मण के नाम दर्ज थी। रामदयाल पुत्र कन्हैयालाल जाति बलई ने तहसीलदार कार्यालय में आवेदन देकर दत्तात्रय को अपना पिता बताते हुए उनकी मृत्यु 21 अगस्त 1958 को होना बताया। आरोप है कि पटवारी पटेल की रिपोर्ट और दो साक्षियों के शपथपत्र के आधार पर 30 अप्रैल 2026 को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए गए। इसके बाद 6 मई को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुआ।


जाति भी बदलकर लिखी गई

इसी आधार पर रामदयाल ने स्वयं को दत्तात्रय का पुत्र बताते हुए आवेदन किया और 7 मई को वारिस प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद 13 मई को ग्राम पंचायत के पत्र और पंचनामा के आधार पर पटवारी ने रिपोर्ट पेश की। 20 मई को फौती नामांतरण का आदेश जारी हुआ। हैरानी की बात यह है कि मूल रिकॉर्ड में दत्तात्रय की जाति ब्राह्मण दर्ज होने के बावजूद फौती नामांतरण आदेश में जाति बलई लिखी गई।

इसके बाद 2 जून को जमीन की रजिस्ट्री सरपंच मनोहर धबाई के बेटे अजय धबाई के नाम कर दी गई। मामले में सरपंच धबाई, सचिव गोपाल यादव, पटवारी राजेश पटेल और तहसीलदार रुपाली जैन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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