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2100 साल पुरानी परंपरा : उज्जैन में सुख-समृद्धि के लिए महाष्टमी पर मदिरा की धार से होगी नगर पूजा

शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर सोमवार को नगर की सुख समृद्धि के लिए मदिरा की धार से नगर पूजा की जाएगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह व एसपी प्रदीप शर्मा सुबह...और पढ़ें

By Rajesh VermaEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 10:28:11 AM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 10:28:11 AM (IST)
2100 साल पुरानी परंपरा : उज्जैन में सुख-समृद्धि के लिए महाष्टमी पर मदिरा की धार से होगी नगर पूजा
देवी को मदिरा का भोग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत करते कलेक्टर। -फाइल फोटो

HighLights

  1. मान्यता 2100 साल से चली आ रही परंपरा
  2. 40 से अधिक देवी, भैरव व हनुमान मंदिर में होगी पूजा
  3. माता महामाया व महालया को लगाएंगे मदिरा का भोग

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर सोमवार को नगर की सुख समृद्धि के लिए मदिरा की धार से नगर पूजा की जाएगी। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह व एसपी प्रदीप शर्मा सुबह 8 बजे चौबीस खंबा स्थित माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत करेंगे।

इसके बाद शासकीय अधिकारी व कोटवारों का दल नगर के विभिन्न कोणों में स्थित 40 से अधिक देवी व भैरव मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए रवाना होगा। करीब 27 किलोमीटर लंबे नगर पूजा मार्ग पर मंदिर की धार लगाई जाएगी। इसमें 25 लीटर से अधिक शराब का उपयोग होगा।


उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा करीब 2100 साल पुरानी है

धार्मिक मान्यता के अनुसार उज्जैन में नगर पूजा की परंपरा करीब 2100 साल पुरानी है। सम्राट विक्रमादित्य ने इसकी शुरुआत की थी। सिंधिया स्टेट के समय भी यह परंपरा कायम रही। आजादी के बाद प्रदेश की सरकार इस परंपरा का निर्वहन करती आ रही है। नगर पूजा का सारा खर्च सरकार और उनके अधिकारी उठाते हैं। एसडीएम लक्ष्मीनारायण गर्ग ने बताया इस बार सोमवार 19 अक्टूबर को नगर पूजा की जाएगी। इसको लेकर सभी आवश्यक तैयारी पूरी कर ली गई है।

तामसिक व सात्विक पूजा

नगर पूजा के दौरान अलग-अलग मंदिरों में तामसिक व सात्विक पूजा की जाती है। कुछ देवी व भैरव मंदिरों मंदिरों मदिरा, दही आदि अर्पित किया जाता है। वहीं हनुमान मंदिरों में नारियल, तेल सिंदूर तथा ध्वज अर्पण की परंपरा है। 27 किलो मीटर लंबे मार्ग पर मदिरा के साथ पूरी, भजिए, भीगे हुए गेहूं-चने (घूघरी) अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है इससे नगर में मौजूद अतृप्त आत्माओं को तृप्ति मिलती है और वे प्रसन्न होकर सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

शक्तिपीठ हरसिद्धि में दोपहर 12 बजे पूजा

देश के 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर में सोमवार को नगर पूजा होगी। इस मंदिर में कलेक्टर अलग से दोपहर 12 बजे पहुंचकर सपत्निक माता हरसिद्धि की पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर प्रबंधक इंद्रेश लोधी ने बताया इस बार 19 अक्टूबर सोमवार को दोपहर 12 बजे शासकीय पूजा होगी। हरसिद्धि माता मंदिर में सात्विक पूजा होती है, कलेक्टर देवी को फल, मिष्ठान, नए वस्त्र, सोलह श्रृंगार अर्पित कर नगरवासियों के सुखी समृद्ध जीवन की प्रार्थना करेंगे।

आज से दो दिन अष्टमी...

शारदीय नवरात्र में रविवार सुबह करीब 8 बजकर 29 मिनट पर अष्टमी तिथि की शुरुआत होगी। निर्णय सिंधू के अनुसार दो दिवसीय पर्वकाल में अष्टमी तिथि पहले दिन 60 घटी हो तो वही मान्य किया जाना चाहिए। धर्मशास्त्र की मान्यता के अनुसार इस दिन दिनभर अष्टमी तिथि की पूजा की जा सकती है। कुल पंरपरा अनुसार जो लोग दिन के हिसाब से अष्टमी तिथि का पूजन करते हैं, उनके लिए वे आज ही पूजा करें। संध्याकाल में महाअष्टमी की पूजा करने वाले भी आज ही पूजा करें क्यों कि संध्या काल में आज ही अष्टमी तिथि रहेगी। -पं.हरिहर पंड्या, ज्योतिषाचार्य

नगर पूजा के लिए कल का दिन सर्वोत्तम

शारदीय नवरात्र में सोमवार को सूर्योदय से सुबह 10 बजकर 31 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी, इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। धर्मशास्त्र में सूर्योदय के समय मौजूद तिथि को दिनभर ग्राह्य किया जाता है। उज्जैन में नगर पूजा के लिए तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यहां परंपरा अनुसार सुबह 8 बजे नगर पूजा की शुरुआत होती है। अगर प्रशासन परिवार को नगर पूजा रखता तो सुबह जब पूजा की शुरुआत होती तब सप्तमी तिथि रहती। सोमवार जब नगर पूजा होगी तब अष्टमी तिथि रहेगी और यही नगर पूजा के लिए सर्वोत्तम दिन है। -ब्रह्मश्री चिलकमर्थी प्रभाकर चक्रवर्ती शर्मा, ज्योतिषाचार्य

नगर पूजा की तारीख को लेकर भ्रम, पूछताछ करते रहे पुजारी

नगर पूजा की तारीख को लेकर शनिवार को देवी और भैरव मंदिरों के पुजारियों में भ्रम की स्थिति बनी रही। कुछ संचार माध्यमों में रविवार को नगर पूजा होने की जानकारी प्रकाशित होने के बाद पुजारी एक-दूसरे को फोन लगाकर तारीख की पुष्टि करते रहे।

दरअसल, प्रशासन की ओर से पुजारियों को नगर पूजा की पूर्व सूचना लिखित में नहीं दी जाती। तहसील कार्यालय से एक दिन पहले फोन कर आयोजन की जानकारी दी जाती है। इस बार प्रशासन का फोन पहुंचने से पहले ही रविवार को नगर पूजा होने की खबर प्रकाशित हो गई। इससे पुजारी असमंजस में पड़ गए। मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया तो आनन-फानन में मंदिरों के पुजारियों को फोन लगवाकर सोमवार को नगर पूजा होने की सूचना दी गई।

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