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उज्जैन में पानी देने की बारी आई तो फेर ली नजरें, सूख गए पौधे, निर्देशों को दिखाया ठेंगा- रोपे विदेशी कीमती सजावटी पौधे

डेढ़ महीने पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिस 18 करोड़ रुपये से बनी वीआईपी स्मार्ट रोड का लोकार्पण किया था, आज वहां बिछाई गई लाखों रुपये की विदेशी ...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 09:42:44 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 09:42:44 AM (IST)
उज्जैन में पानी देने की बारी आई तो फेर ली नजरें, सूख गए पौधे, निर्देशों को दिखाया ठेंगा- रोपे विदेशी कीमती सजावटी पौधे
कलेक्ट्रेट से देवास रोड पहुंच मार्ग पर डेढ़ महीने पहले लगाई लाखों रुपये की कारपेट घास की स्थिति। पाम, फाइकस जैसे सजाटवी कीमती पौधे सूख गए। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. लाखों रुपये की विदेशी कारपेट घास और पाम, फाइकस, सजावटी पौधे बिना पानी के दम तोड़ चुके हैं
  2. अफसरों ने छायादार वृक्षों की जगह महंगे और सजावटी पाम और अन्य पौधे रोप दिए
  3. राहगीरों को तपती धूप में छांव देने के बजाय सिर्फ सड़क की ‘शो-बाज़ी’ बढ़ाने पर ध्यान दिया गया

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकारी खजाने को किस तरह चूना लगाया जाता है, इसकी एक बानगी कलेक्ट्रेट से देवास रोड पहुंच मार्ग पर साफ देखी जा सकती है।

डेढ़ महीने पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिस 18 करोड़ रुपये से बनी वीआईपी स्मार्ट रोड का लोकार्पण किया था, आज वहां बिछाई गई लाखों रुपये की विदेशी कारपेट घास और पाम, फाइकस, सजावटी पौधे बिना पानी के दम तोड़ चुके हैं।

सिर्फ सड़क की ‘शो-बाज़ी’ बढ़ाने पर ध्यान दिया गया

कलेक्टर कार्यालय से देवास रोड को जोड़ने वाले इस नवनिर्मित मार्ग पर अफसरों ने छायादार वृक्षों की जगह महंगे और सजावटी पाम और अन्य पौधे रोप दिए। राहगीरों को तपती धूप में छांव देने के बजाय सिर्फ सड़क की ‘शो-बाज़ी’ बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। लेकिन लापरवाही की हद देखिए, लगाने के बाद इन पौधों को पानी तक नसीब नहीं हुआ। आज ये पौधे और घास पूरी तरह सूखकर भूरे हो चुके हैं, जो न केवल नगर निगम के दावों की पोल खोल रहे हैं बल्कि सीधे तौर पर जनता के पैसे और मानव श्रम की बर्बादी हैं।


पर्यावरणप्रेमियों का कहना है कि सड़क किनारे नीम, बरगद, पीपल, जामुन और आम जैसे पारंपरिक और छायादार पेड़ लगाए जाने चाहिए, जो राहगीरों को छांव और फल-फूल दे सकें। वन विभाग और नर्सरियों में ये छायादार पौधे मात्र 15 से 30 रुपये में मिल जाते हैं। इसके उलट, अफसरों की पसंद के महंगे सजावटी पौधे होते हैं, जिनकी सरकारी फाइलों में कीमत हजार से दो हजार रुपये या उससे भी अधिक दिखाई जाती है।

जितना महंगा पौधा होता है, उतना ही मोटा कमीशन बनता है

जानकारों के मुताबिक, जितना महंगा पौधा होता है, उतना ही मोटा कमीशन बनता है। यही वजह है कि महापौर मुकेश टटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया से लेकर स्वयं मुख्यमंत्री के निर्देशों को भी दरकिनार कर अफसरशाही सिर्फ सजावटी पौधे लगाती रही। जबकि संभागायुक्त और कलेक्टर पिछली बैठकों में सजावटी की बजाय छायादार पारंपरिक पौधे लगाने पर दिशा-निर्देश देते आए हैं। प्रश्न उठता है कि फिर आखिर कौन है जिन्होंने प्रोटोकाल वाले जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बात नहीं मानी।

फोरलेन मार्गों पर भी यही हाल, नेशनल हाईवे पर पेड़ गायब

यह बदहाली सिर्फ नगर निगम या स्मार्ट सिटी की सड़कों तक सीमित नहीं है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई ) द्वारा उज्जैन से जोड़कर बनाए देवास, आगर और बड़नगर-बदनावर फोरलेन मार्गों पर भी आज तक छायादार पेड़ बनने वाले पौधे नहीं लगाए गए। कुछ हिस्सों में केवल खानापूर्ति के लिए बोगनबेलिया और कनेर की झाड़ियां जुरूर दिखाई देती हैं, जिनकी भी देखरेख शून्य है।

एक तरफ रोपने का ढोंग, दूसरी तरफ 3 साल में काट डाले 10 हजार पेड़

एक तरफ वर्षाकाल में सिंहस्थ के मद्देनजर 10 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है, तो दूसरी तरफ नगर निगम की कथनी और करनी का अंतर भी सामने आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में नगर निगम ने करीब एक करोड़ रुपये का शुल्क लेकर 10 हजार से अधिक पेड़ काटने की आधिकारिक अनुमति जारी की है। यह तो सिर्फ ‘आन रिकार्ड’ का आंकड़ा है ; जो पेड़ बिना अनुमति के रातों-रात काट दिए गए, उनकी गिनती और लकड़ी का तो कोई हिसाब ही नहीं है।

पर्यावरण दिवस पर ''जन आंदोलन'' का दावा, पर सवाल बरकरार

कल विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के मौके पर नगर निगम शहर के विभिन्न हिस्सों में दो हजार से अधिक पौधे रोपने की तैयारी में है। इसे लेकर महापौर मुकेश टटवाल ने सिंहस्थ मेला कार्यालय में सामाजिक और पर्यावरण प्रेमी संस्थाओं के साथ बैठक की है। इस अभियान को सरकारी आयोजन के बजाय ''जन आंदोलन'' बनाने का दावा किया गया है।

कहा गया है कि दो हजार पौधे कालिदास उद्यान, गोवर्धन सागर, नरसिंह घाट, मयूर वन, नगर वन और नानाखेड़ा फोर-आर पार्क में रोपे जाएंगे। ये पौधे कौनसे होंगे ये 5 जून को देखने में आएगा। महापौर का कहना है कि महाकुंभ सिंहस्थ-2026 के लिए उज्जैन में इस सीजन में 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। सिंहस्थ क्षेत्र में विशेष रूप से 10 से 12 फीट ऊंचे पौधे लगाए जाएंगे ताकि वे जल्द बड़े हो सकें। इस बीच सवाल यही है कि जब डेढ़ महीने पहले लगाए गए पौधों को निगम पानी नहीं दे पाया, तो नए लगाए जाने वाले हजारों पौधों को जिंदा रखने की क्या गारंटी है। स्थिति तो बतलाती है कि यह भी सिर्फ एक दिन का फोटो सेशन बनकर रह जाएगा।

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