उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अखिल भारतीय कालिदास समारोह में गुरुवार शाम लोकनाट्य माच के कलाकारों ने महाकवि कालिदास का मंचन किया। प्रस्तुति मालव लोककला केंद्र उज्जैन के कलाकारों ने कृष्णा वर्मा के निर्देशन में दी गई। तत्पश्चात उज्जैन की ही मयूरी सक्सेना ने कथक प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर अरुण कुशवाह, सारंगी पर सैयद अरशद ने संगत की। गायन निधि जैन ने किया। पढ़त पं. कुलदीप दुबे ने की। कालिदास संस्कृत अकादमी के प्रभारी निदेशक डा. संतोष पंड्या ने बताया शुक्रवार शाम 7 बजे पंडित सूर्यनारायण व्यास संकुल में इंदौर की सुचित्रा हरमलकर एवं समूह द्वारा नृत्य नाटिका वीरांगना का मंचन किया जाएगा। इंदौर की ही मुद्रा बेंद्रे द्वारा शास्त्रीय कथक की प्रस्तुति दी जाएगी।
सम्राट विक्रमादित्य का ठाठ खूब जमा
उज्जैन। अखिल भारतीय कालिदास समारोह की तीसरी सांझ में विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति द्वारा संजीव मालवीय के निर्देशन में हिंदी नाटक सम्राट विक्रमादित्य का प्रभावी और रंजक मंचन किया गया। ध्वनि और प्रकाश माध्यम से संयोजित इस नाट्य प्रस्तुति की संरचना मूलतः मुक्ताकाशीय में करना चुनौतीपूर्ण था पर निर्देशन और कलाकारों ने इस चुनौती का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। नाटक राजकुमार विक्रम के जन्मोत्सव के शुरू हुआ। फिर शकों द्वारा उज्जयिनी और भारत के विभिन्ना् भागों को जीतने से लेकर विक्रमादित्य द्वारा उन्हें परास्त कर देश से बाहर खदेड़ने तक के प्रसंग मंचित किए गए। विक्रम के राज्याभिषेक और विक्रम संवत की शुरुआत के दृश्य से नाटक का समाहार हुआ। नाट्य प्रस्तुति के दौरान पार्श्व में स्क्रीन पर विभिन्ना दृश्य प्रदर्शित होते रहे। प्रस्तुति में सौ से अधिक कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया। दुर्गेश बाली (सूत्रधार), वासु सोनी (विक्रम), तनिशा शर्मा (राजकुमारी) और शरद शर्मा (बेताल) का अभिनय विशेष प्रशंसनीय रहा। विजेंद्र वर्मा (कार्यकारी निर्देशक), इंदरसिंह बैस (संगीत), कुमार शिवम, केबी पंड्या, विशाल मेहता (रूप सज्जा) का योगदान प्रस्तुति की प्रभावशीलता को बढ़ाने में बहुत सहायक रहा। दर्शकों ने नाट्य प्रदर्शन की भरपूर सराहना की। प्रत्येक दृश्य के बाद संकुल में करतल ध्वनियां गूंजती रहीं। नाट्य रचना डा.भगवतीलाल राजपुरोहित ने की थी।