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कान्ह डायवर्जन परियोजना : सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को शिप्रा के स्वच्छ जल में स्नान करवाने के लिए 358 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर

राज्य मंत्रिपरिषद की मंगलवार को हुई बैठक में धार्मिक-पर्यटन नगरी उज्जैन के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए रा...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 30 Sep 2026 03:53:22 PM (IST)Updated Date: Wed, 30 Sep 2026 03:53:22 PM (IST)
कान्ह डायवर्जन परियोजना : सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को शिप्रा के स्वच्छ जल में स्नान करवाने के लिए 358 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर
शिप्रा नदी के तट पर बसा उज्जैन और घाट। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. प्रोजेक्ट पूरा होने में अभी लगभग सालभर का समय शेष है
  2. प्रोजेक्ट पूरा होने से पहले उठाया मास्टर स्ट्रोक
  3. कान्ह डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना को दो साल से धरातल पर उतारा रहा है

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : राज्य मंत्रिपरिषद की मंगलवार को हुई बैठक में धार्मिक-पर्यटन नगरी उज्जैन के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 920 करोड़ रुपये की ‘कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना’ के निरंतर और निर्बाध संचालन के लिए 358 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत कर दी। जबकि प्रोजेक्ट पूरा होने में अभी लगभग सालभर का समय शेष है।

प्रबुद्धजनों के अनुसार परियोजना के पूर्ण होने से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी माना जा रहा है। सरकार के इस कदम से परियोजना के शेष निर्माण कार्यों और वित्तीय प्रबंधन को अभूतपूर्व गति मिलेगी, जिससे समय सीमा के भीतर काम पूरा होना सुनिश्चित हो सकेगा।


मालूम हो कि सिंहस्थ-2028 का स्नान श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के स्वच्छ जल में कराने के लिए जल संसाधन विभाग 920 करोड़ रुपये की कान्ह डायवर्जन क्लोज डक्ट परियोजना को दो साल से धरातल पर उतार रही है। अब तक 70 प्रतिशत के आसपास काम हो चुका है। प्रोजेक्ट पूरा करने की समय सीमा सितंबर- 2027 निर्धारित है।

परियोजना के तहत 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत टनल और 18 किलोमीटर लंबा क्लोज डक्ट नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे इंदौर से आने वाला कान्ह का प्रदूषित पानी शिप्रा में मिलने से पूरी तरह रोका जा सकेगा। यह परियोजना सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं को शुद्ध शिप्रा जल उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम है।

स्मरण रहे कि इस परियोजना का भूमिपूजन 15 जून 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया था। पालखेड़ी, चिंतामन जवासिया, बामोरा, देवराखेड़ी गांवों में जमीनी सतह से 25 मीटर नीचे गहरी टनल बनाई जा रही है, जबकि छायन और कोकलाखेड़ी सहित आसपास के गांव में डी आकार की पाइपलाइन बिछाई जा रही है।

प्रदूषित कान्ह नदी का 40 क्यूमेक प्रदूषित पानी क्लोज डक्ट के जरिये सीधे गंभीर नदी के डाउनस्ट्रीम में जाएगा, जिससे त्रिवेणी से कालियादेह महल तक शिप्रा नदी में शुद्ध जल रहेगा। सिंहस्थ- 2028 के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए शिप्रा नदी में शुद्ध जल की उपलब्धता रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल सिंहस्थ की जरूरत नहीं बल्कि उज्जैन के दीर्घकालीन नदी संरक्षण का स्थायी समाधान है। शिप्रा के प्रदूषणमुक्त होने से धार्मिक आस्था, पर्यावरणीय संतुलन और पर्यटन तीनों को दीर्घकालीन लाभ मिलेगा।

ऊपर खेती, नीचे बहेगी नदी

परियोजना के पूरी होने अद्भुत नजारा दिखेगा। टनल जमीन की सतह से करीब 25 मीटर नीचे बनाई जा रही है, जिससे ऊपर की जमीन का उपयोग पूर्व की तरह खेती के लिए जारी रहेगा। किसानों की भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता न्यूनतम रहेगी और सतही पर्यावरण प्रभावित नहीं होगा। भूमिगत क्लोज डक्ट से प्रदूषित जल सीधे गंभीर नदी में प्रवाहित होगा, जबकि जमीन पर सामान्य गतिविधियां निर्बाध चलती रहेंगी। यानी ऊपर खेती होगी और जमीन के नीचे कान्ह नदी बहेगी।

मिशन मोड में पूरा होगा काम

इस भारी बजटीय आवंटन के बाद अब जल संसाधन विभाग और कार्यदायी एजेंसियों पर काम को तय समय सीमा में पूरा करने का दबाव रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस राशि से क्लोज डक्ट निर्माण, टनलिंग, भूमि अधिग्रहण और रखरखाव से जुड़े कार्यों को बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रखा जा सकेगा, जिससे उज्जैन को एक स्थायी और स्वच्छ नगरीय-पर्यावरणीय मॉडल के रूप में स्थापित किया जा सके।

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