
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा पर 4 मार्च से गर्मी की शुरुआत होगी। अवंतिकानाथ महाकाल ठंडे जल से स्नान करेंगे। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरती का समय बदलेगा। भगवान महाकाल की गर्मी के अनुसार दिनचर्या का अनुक्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा।
महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में साल में दो बार भगवान महाकाल की दिनचर्या व आरती का समय बदलता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक छह माह भगवान की दिनचर्या सर्दी के अनुसार रहती है तथा भगवान महाकाल गर्म जल से स्नान करते हैं।
वर्तमान में अवंतिकानाथ की सेवा पूजा सर्दी के अनुसार ही की जा रही है। होली के अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से भगवान की दिनचर्या गर्मी के अनुकूल रहेगी। पुजारी भगवान को ठंडे जल से स्नान कराएंगे। इसके साथ ही आरती का समय बदलेगा।
महाशिवरात्रि के बाद फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा पर भगवान महाकाल के पंच मुखारविंद दर्शन की परंपरा है। इस बार 18 फरवरी को संध्या आरती में भगवान महाकाल के पंचमुखारविंद दर्शन होंगे। भक्तों को भगवान महाकाल के एक साथ पांच रूप मनमहेश, उमा महेश, छबीना, होलकर, शिवतांडव रूप के दर्शन होंगे। मान्यता है शिवनवरात्र में जो भक्त भगवान महाकाल के विभिन्न रूप के दर्शन नहीं कर पाए हैं, वे फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा पर भगवान के एक साथ पांच रूपों के दर्शन कर सकते हैं।
महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लड्डू प्रसाद बिका है। मंदिर प्रशासन के अनुसार दो दिन में आठ लाख से अधिक भक्तों ने भगवान महाकाल को शीश नवाया। देशभर से आए श्रद्धालु अपने साथ भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद भी खरीदकर ले गए हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि 1 करोड़ 95 लाख 82 हजार 200 रुपये का लड्डू प्रसाद बिका है।