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4 मार्च से बदलेगी भगवान महाकाल की दिनचर्या, ठंडे जल से करेंगे स्नान; तीन आरती का समय बदलेगा

Mahakal Mandir Ujjain: कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक छह माह भगवान की दिनचर्या सर्दी के अनुसार रहती है तथा भगवान महाकाल गर्म जल से स्ना...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 18 Feb 2026 01:22:15 PM (IST)Updated Date: Wed, 18 Feb 2026 02:04:57 PM (IST)
4 मार्च से बदलेगी भगवान महाकाल की दिनचर्या, ठंडे जल से करेंगे स्नान; तीन आरती का समय बदलेगा
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग। फाइल फोटो

HighLights

  1. चैत्र कृष्ण प्रतिपदा पर 4 मार्च से गर्मी की शुरुआत मानी जाती है
  2. इसके साथ ही अवंतिकानाथ महाकाल ठंडे जल से स्नान करेंगे
  3. गर्मी के अनुसार महाकाल की दिनचर्या शरद पूर्णिमा तक चलेगी

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा पर 4 मार्च से गर्मी की शुरुआत होगी। अवंतिकानाथ महाकाल ठंडे जल से स्नान करेंगे। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पांच में से तीन आरती का समय बदलेगा। भगवान महाकाल की गर्मी के अनुसार दिनचर्या का अनुक्रम शरद पूर्णिमा तक चलेगा।

महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में साल में दो बार भगवान महाकाल की दिनचर्या व आरती का समय बदलता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक छह माह भगवान की दिनचर्या सर्दी के अनुसार रहती है तथा भगवान महाकाल गर्म जल से स्नान करते हैं।


वर्तमान में अवंतिकानाथ की सेवा पूजा सर्दी के अनुसार ही की जा रही है। होली के अगले दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से भगवान की दिनचर्या गर्मी के अनुकूल रहेगी। पुजारी भगवान को ठंडे जल से स्नान कराएंगे। इसके साथ ही आरती का समय बदलेगा।

कार्तिक प्रतिपदा से होली तक आरती का समय

  • भस्म आरती : तड़के 4 बजे से सुबह 6 बजे तक
  • बालभोग आरती : सुबह 7.30 बजे से 8.15 बजे
  • भोग आरती : सुबह 10.30 से 11.15 बजे तक
  • संध्या पूजा : शाम 5 बजे
  • संध्या आरती : शाम 6.30 से शाम 7.15 बजे तक
  • शयन आरती : रात 10.30 से रात 11 बजे तक

चैत्र प्रतिपदा से शरद पूर्णिमा तक आरती का समय

  • भस्म आरती : तड़के 4 से सुबह 6 बजे तक
  • बालभोग आरती : सुबह 7 से 7.45 बजे तक
  • भोग आरती : सुबह 10 से 10.45 बजे तक
  • संध्या पूजा : शाम 5 बजे
  • संध्या आरती : शाम 7 से 7.45 बजे तक
  • शयन आरती : रात 10.30 से 11 बजे तक

18 फरवरी को होंगे पंच मुखारविंद दर्शन

महाशिवरात्रि के बाद फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा पर भगवान महाकाल के पंच मुखारविंद दर्शन की परंपरा है। इस बार 18 फरवरी को संध्या आरती में भगवान महाकाल के पंचमुखारविंद दर्शन होंगे। भक्तों को भगवान महाकाल के एक साथ पांच रूप मनमहेश, उमा महेश, छबीना, होलकर, शिवतांडव रूप के दर्शन होंगे। मान्यता है शिवनवरात्र में जो भक्त भगवान महाकाल के विभिन्न रूप के दर्शन नहीं कर पाए हैं, वे फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा पर भगवान के एक साथ पांच रूपों के दर्शन कर सकते हैं।

डेढ़ करोड़ रूपये से अधिक का लड्डू प्रसाद बिका

महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का लड्डू प्रसाद बिका है। मंदिर प्रशासन के अनुसार दो दिन में आठ लाख से अधिक भक्तों ने भगवान महाकाल को शीश नवाया। देशभर से आए श्रद्धालु अपने साथ भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद भी खरीदकर ले गए हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि 1 करोड़ 95 लाख 82 हजार 200 रुपये का लड्डू प्रसाद बिका है।