नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन (Mahakaleshwar Temple Ujjain)। बारह ज्योतिर्लिंगों में महाकालेश्वर एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां श्रावण का उल्लास डेढ़ माह छाया रहता है। इस बार भी 11 जुलाई से 18 अगस्त तक 39 दिवसीय आयोजन होगा। प्रत्येक सोमवार को भगवान महाकाल की छह सवारी निकलेगी। अभा श्रावण महोत्सव व श्री महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होगा। देश के मूर्धन्य कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे। मंदिर प्रशासन द्वारा उसी के अनुसार व्यवस्था तय की जा रही है।
महाकाल मंदिर की पूजन परंपरा में स्टेट के समय से महाराष्ट्रीयन पूजा पद्धति का प्रभाव है। महाराष्ट्रीयन परंपरा में शुक्ल पक्ष से माह की शुरुआत होती है। ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया आजादी के पहले श्रावण शुक्ल से सवारी निकलना शुरू होती थी, जो भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक निकाली जाती थी।
आजादी के बाद श्रावण मास में सवारी निकाले जाने का क्रम श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की बजाय श्रावण कृष्ण पक्ष से शुरू किया गया, लेकिन समापन का क्रम भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर रही रखा गया। इसलिए मंदिर में श्रावण डेढ़ माह का होने लगा, अब भी यह परंपरा जारी है। इसलिए इसे श्रावण-भाद्रपद मास कहा जाता है।
प्रत्येक रविवार को रात 2.30 बजे तथा सप्ताह में शेष दिन रात 3 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। इसके बाद भगवान महाकाल की भस्म आरती होगी। सामान्य भक्तों को बिना अनुमति भस्म आरती के चलायमान दर्शन होंगे। भक्तों को सुविधा से भस्म आरती के दर्शन हों, इसलिए कार्तिकेय मंडपम में तीन लाइन चलाई जाएगी।
श्रावण मास में भगवान शिव के जलाभिषेक का महत्व है। इसी धार्मिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने सामान्य दर्शनार्थियों के लिए भी जलाभिषेक की व्यवस्था की है। मंदिर में दो स्थानों पर कार्तिकेय व सभामंडप में जल पात्र लगाए गए हैं। भक्त पात्र के माध्यम से भगवान को जल अर्पण कर सकेंगे।
मंदिर प्रशासन ने पांच स्थानों पर जूता स्टैंड स्थापित किए हैं। दर्शनार्थी किसी भी दिशा से मंदिर पहुंचे उन्हें हर प्रवेश द्वार के पास निश्शुल्क जूता स्टैंड की सुविधा मिलेगी। सामान्य दर्शनार्थियों के लिए त्रिवेणी संग्रहालय, श्री महाकाल महालोक प्लाजा मानसरोवर भवन के पास जूता स्टैंड रहेगा। इसके अलावा बड़ा गणेश, विक्रमटीला, हरसिद्धि चौराहा तथा महाकाल मंदिर के प्रशासनिक कार्यालय के समीप भी जूता स्टैंड बनाया गया है।
श्रावण मास में भगवान महाकाल के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को ज्यादा पैदल नहीं चलना पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने प्रवेश द्वार के सामने तक वाहन पार्क करने की व्यवस्था की है। मंदिर के आसपास 500 मीटर एरिया में पांच बड़ी पार्किंग का निर्माण किया गया है। श्रद्धालु श्री महाकाल महालोक के सामने सरफेस पार्किंग में वाहन पार्क कर सकते हैं। इसके अलावा हाट बाजार मैदान, मेघूदत वन, नीलकंठ, चारधाम मंदिर तथा कार्तिक मेला ग्राउंड में पाहन पार्क किए जा सकते हैं।
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार के दिन मंदिर समिति भगवान महाकाल के भक्तों को महाकालेश्वर अन्नक्षेत्र में निश्शुल्क फलाहारी महाप्रसादी कराएगी। श्रद्धालुओं को शुद्ध देशी घी से बना राजगीरा का हलवा, केसरिया खीर, ड्रायफ्रूट खिचड़ी तथा मालवा की प्रसिद्ध आमठी परोसी जाएगी। सप्ताह के शेष दिन भक्तों को भोजन कराया जाएगा।
श्रावण शुक्ल पंचमी पर 29 जुलाई को नागपंचमी मनाई जाएगी। एक साल बाद महाकाल मंदिर के शीर्ष पर स्थित भगवान नाचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलेंगे। 28 जुलाई से दर्शन का सिलसिला शुरू होगा, जो 29 जुलाई को रात 12 बजे तक चलेगा। एक दिन में करीब दो लाख भक्त भगवान नांचद्रेश्वर के दर्शन करेंगे।
श्रावणी पूर्णिमा पर रक्षाबंधन के दिन 9 अगस्त को श्रावण मास का समापन होगा। मंदिर की परंपरा अनुसार इस दिन भस्म आरती में भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का महाभोग लगाया जाएगा। भक्तों को दिनभर लड्डू महाप्रसादी का वितरण किया जाएगा। जो भक्त पूरे माह श्रावण का उपवास रखते हैं, वे भगवान महाकाल का लड्डू प्रसाद ग्रहण कर उपवास खोलते हैं।