• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • Mutual Funds मास्टरी
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • उज्जैन

उज्जैन: महाकाल मंदिर पार्किंग की सरकारी जमीन की रजिस्ट्री पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को नोटिस जारी

महाकाल मंदिर पार्किंग में उपयोग की जा रही शासकीय जमीन की रजिस्ट्री को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत हुई है। कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जा...और पढ़ें

By Kuldeep BhawsarEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 21 Jul 2026 10:34:47 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Jul 2026 10:34:46 PM (IST)
उज्जैन: महाकाल मंदिर पार्किंग की सरकारी जमीन की रजिस्ट्री पर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को नोटिस जारी
महाकाल मंदिर पार्किंग की सरकारी जमीन की रजिस्ट्री पर हाई कोर्ट सख्त

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। महाकाल मंदिर पार्किंग में उपयोग की जा रही शासकीय जमीन की रजिस्ट्री को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका प्रस्तुत हुई है। कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर पूछा है कि शासकीय जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई।

एडवोकेट जयेश गुरनानी ने बताया कि उज्जैन महाकाल मंदिर के पास करीब 40 हजार वर्गफीट जमीन है। इसे हरि फाटा पार्किंग के नाम से पहचाना जाता है। वर्ष 1950 में यह जमीन राजस्व रिकार्ड में शासकीय कारखाने के नाम से दर्ज थी। बाद में इस पर निजी नाम दर्ज हो गए।


तहसीलदार की अनुशंसा के बावजूद कंपनी के नाम हुई रजिस्ट्री

वर्ष 2025 में इस जमीन को शासकीय घोषित करने की अनुशंसा करते हुए तहसीलदार ने वरिष्ठ अधिकारियों के पास फाइल भेजी थी। इस अनुशंसा पर कोई निर्णय होता इसके पहले ही इस जमीन की रजिस्ट्री एक कंपनी को कर दी गई। शिकायत भी हुई लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस पर याचिकाकर्ता राजेंद्र कुवेल ने हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत कर दी।

कोर्ट के समक्ष रखे गए महत्वपूर्ण दस्तावेज और सिंहस्थ 2028 का हवाला

मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष जमीन की वर्तमान स्थिति के साथ ही तहसीलदार के द्वारा दी गई रिपोर्ट सहित अन्य दस्तावेज रखे गए। गुरनानी ने बताया कि हमने कोर्ट को यह भी बताया कि वर्ष 2028 में सिंहस्थ है। इस दौरान उज्जैन में करोड़ों लोग आएंगे। ऐसे में अव्यवस्था हो सकती है। शासकीय जमीन का उपयोग पार्किंग के रूप में किया जाता है। मामले में अब 7 सितंबर को फिर सुनवाई होगी।

यह भी पढ़ें- Indore Weather 22nd July: इंदौर में अगले दो दिन होगी बारिश, संभाग के 19 जिलों में भी बरसात का IMD अलर्ट