उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से राजाधिराज के शीश अविरल शीतल जलधारा प्रवाहित की जाएगी। इसके लिए पुजारी गलंतिका (मिट्टी के कलश) बांधेंगे। मान्यता है वैशाख व ज्येष्ठ मास में गर्मी अपने चरम पर होती है। भीषण गर्मी में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए मिट्टी के कलशों के माध्यम से शिवलिंग पर ठंडे जल की धारा अर्पित की जाती है।

मंदिर समिति सदस्य पं.आशीष पुजारी ने बताया मंदिर की परंपरा अनुसार वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तक दो माह गलंतिका बांधी जाती है। 20 अप्रैल से पुजारी भस्मारती के बाद विभिन्न् नदियों के नाम से 11 मटकियां बांधेंगे। इनके द्वारा दिनभर भगवान के शीश ठंडे जल की धारा प्रवाहित की जाएगी।

प्रतिदिन शाम को संध्या पूजन होने तक यह क्रम जारी रहेगा। ज्योतिर्विद पं.आनंदशंकर व्यास के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने विष पान किया था। हलाहल की गर्मी से ठंडक प्रदान करने के लिए भगवान का जलाभिषेक करते हैं। इससे शिव प्रसन्न् होते हैं। वैशाख मास में गर्मी की तीव्रता बढ़ जाती है, ऐसे में भगवान को ठंडक प्रदान करने के लिए गलंतिका बंधन की मान्यता है। नगर के अन्य शिव मंदिरों में भी वैशाख मास में गलंतिका बांधी जाएगी।

Posted By: Prashant Pandey

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