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Rain in Ujjain: उज्जैन में मानसून की दस्तक, सड़कें बनीं तालाब; गड्ढों पर फिसलकर गिरे लोग

उज्जैन में मानसून की पहली जोरदार बरसात ने बुधवार शाम 4:30 बजे नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों की पोल खोल दी।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 08:29:48 AM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 08:33:22 AM (IST)
Rain in Ujjain: उज्जैन में मानसून की दस्तक, सड़कें बनीं तालाब; गड्ढों पर फिसलकर गिरे लोग
केडी गेट चौराहे पर बुधवार शाम पानी भराने से रिक्शा चालक को गड्ढा न दिखा और गाड़ी गड्ढे में गिर गई। ऐसे हालात शहर में कई जगह बने।

HighLights

  1. नालियां उफान पर आ गईं और पानी सड़कों पर फैल गया
  2. उज्जैन शहर की सड़कों की मरम्मत और पेंचवर्क नहीं हो सका
  3. निगम द्वारा शहर में कई जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मानसून की पहली जोरदार बरसात ने बुधवार को ही नगर निगम और जिला प्रशासन के दावों की हकीकत सामने ला दी। शाम करीब 4.30 बजे शुरू हुई बरसात ने एक घंटे के भीतर शहर की सड़कों को तालाब में बदल दिया। कई क्षेत्रों में पानी इतना भर गया कि वाहन बीच सड़क पर बंद हो गए, लोग गड्ढों में गिरकर घायल हुए और घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही।

शहर में जल निकासी और आपदा प्रबंधन की तैयारियां पहली ही बारिश में फेल होती नजर आईं। सबसे ज्यादा परेशानी उन क्षेत्रों में हुई, जहां मार्ग चौड़ीकरण और सीवरेज पाइपलाइन बिछाने के काम चल रहे हैं। एमआर-4, कंठाल से छत्रीचौक, केडी गेट, रामघाट पहुंच मार्ग और कई कालोनियों की खुदी हुई सड़कें लोगों के लिए मुसीबत बन गईं। सड़क पर भरे पानी में गड्ढे दिखाई नहीं दिए और कई दोपहिया चालक फिसलकर गिर गए।


जलभराव में फंसे रहे लोग

कुछ लोगों को चोटें आईं तो कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। फोटो में दिख रही स्थिति शहर की तैयारियों पर सवाल खड़े करती है। कई स्थानों पर आटो, ई-रिक्शा और दोपहिया वाहन पानी में फंस गए। वाहन चालकों को धक्का लगाकर उन्हें बाहर निकालना पड़ा। कार्यालय और बाजार से घर लौट रहे लोग घंटों तक जाम और जलभराव में फंसे रहे।

हर साल मानसून से पहले नगर निगम नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों के दावे करता है। शहर के अनेक हिस्सों में नालियां उफान पर आ गईं और पानी सड़कों पर फैल गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब बरसात का सीजन शुरू होने से पहले ही सड़कों की मरम्मत और पेंचवर्क नहीं हो सका, तो आने वाले दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात कितने बिगड़ सकते हैं।

सड़कें खोदकर छोड़ दी गई

निगम द्वारा शहर में कई जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। कहीं सीवरेज लाइन डालने के बाद सड़कें ठीक नहीं की गईं तो कहीं मार्ग चौड़ीकरण के कारण रास्ते उबड़-खाबड़ हैं। ऐसे में ये क्षेत्र अब डेंजर जोन बनकर सामने आ रहे हैं। बरसात ने एक बार फिर शहर की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यदि केवल 49 मिलीमीटर बारिश में शहर की यह स्थिति है तो भारी बारिश की स्थिति में बाढ़ जैसे हालात बनने से इंकार नहीं किया जा सकता। नागरिकों का कहना है कि हर साल बारिश के बाद प्रशासन सक्रिय होता है, जबकि जरूरी है कि मानसून से पहले ही व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं।

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