
MP News: नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मध्य प्रदेश धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग संचालनालय जल्द ही राजधानी भोपाल से धर्मधानी उज्जैन में स्थानांतरित होगा। रविवार को संचालनालय के डायरेक्टर ई. रमेश कुमार उज्जैन पहुंचे तथा भगवान महाकाल के दर्शन किए। इसके बाद उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। मंदिर प्रशासक मृणाल मीना व सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने उन्हें दर्शन व्यवस्था, भस्म आरती तथा निर्माण संबंधी जानकारी दी।

उज्जैन जिले में ज्योतिर्लिंग महाकाल सहित करीब ढाई हजार से अधिक मंदिर शासकीय स्वामित्व के हैं। इन मंदिरों के उचित रखरखाव व व्यवस्था के सुविधा पूर्वक संचालन के लिए मध्य प्रदेश धार्मिक न्यास एव धर्मस्व विभाग संचालनालय उज्जैन में लाने की योजना है।
मार्च में ही इसका मसौदा भी तैयार हो गया है और लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के बाद संचालनालय की शहर में शुरुआत हो जाएगी। इसी उद्देश्य को लेकर विभाग के डायरेक्टर ई रमेश कुमार उज्जैन पहुंचे थे। मंदिर प्रशासक मीणा ने बताया कि महाकाल दर्शन के उपरांत ई रमेश को मंदिर की व्यवस्थाओं से संबंधित संपूर्ण जानकारी दी गई है।

बता दें कि धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग को उज्जैन स्थानांतरित करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने उच्च शिक्षा मंत्री रहते दिया था। तब मुख्यमंत्री रहे शिवराजसिंह चौहान और मंत्रिमंडल को तर्क दिया था कि उज्जैन में सबसे अधिक मंदिर हैं, इसलिए धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग का संचालनालय उज्जैन में होना चाहिए।
विभाग के कुछ अधिकारियों ने स्थानांतरण पर व्यावहारिक दिक्कतें भी बताई थीं। कहा था कि इससे प्रदेश की राजधानी से संचालनालय बाहर चला जाएगा और फाइलों के मूवमेंट में भी दिक्कत आएगी। इसके चलते शिवराज सरकार ने प्रस्ताव स्वीकृत नहीं किया था। प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव बने तो उन्होंने उस प्रस्ताव को बाहर निकलवाया और मार्च में हुई कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई थी।
विभाग मंदिरों का जीर्णोद्धार, धर्मशाला का निर्माण, पुजारियों की नियुक्ति, पदस्थापन और मानदेय वितरण का कार्य करता है। मध्यप्रदेश तीर्थ-स्थान एवं मेला प्राधिकरण के माध्यम से तीर्थ-स्थलों एवं अतिप्रसिद्ध मेलों की उचित व्यवस्था के लिए अनुदान भी उपलब्ध कराता है।
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग का गठन 1981 में हुआ था। विभाग का सालाना बजट 100 करोड़ रुपये है। शुरुआत में विभाग का कार्य कमिश्नर और कलेक्टर के माध्यम से किया जाता था। 2016 में कार्यालय संचालनालय धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व का गठन किया गया। यह कार्यालय सतपुड़ा भवन में संचालित हो रहा है।
उज्जैन में विभाग स्थानांतरित होने से सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर कार्यों को कराने में आसानी होगी। बशर्ते कि विभाग, कर्मचारियों की कमी की बड़ी चुनौती से पार पा जाए। धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग ने पिछले 42 वर्षों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
जानकारों का कहना है कि रिक्त पदों को भर, विभाग को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाकर विभाग की छवि सुधारी जा सकती है। सिंहस्थ के मद्देनजर यहां के 84 महादेव, षड् विनायक, नौ नारायण मंदिरों सहित अनेकों धार्मिक स्थलों के विस्तार एवं सुंदरीकरण की योजना बनकर उनका क्रियान्वयन होना है। ऐसे में विभाग का उज्जैन स्थानांतरित होना न केवल उज्जैन बल्कि मालवा-निमाड़ अंचल के सभी मंदिरों के लिए शुभ संकेत होगा।