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मोक्षदायिनी शिप्रा नदी की बदहाली पर एनजीटी ने अपनाया कड़ा रूख, त्रिवेणी से भैरवगढ़ तक टीम ने किया निरीक्षण

मोक्षदायिनी शिप्रा नदी की वर्तमान स्थिति को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है।

By Dheeraj GomeEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 03 Mar 2026 11:40:43 AM (IST)Updated Date: Tue, 03 Mar 2026 11:42:12 AM (IST)
मोक्षदायिनी शिप्रा नदी की बदहाली पर एनजीटी ने अपनाया कड़ा रूख, त्रिवेणी से भैरवगढ़ तक टीम ने किया निरीक्षण

HighLights

  1. उज्जैन के प्रमुख घाटों पर स्थिति चिंताजनक
  2. स्टॉपडैम और रिटेनिंग वाल के कार्यों का भी निरीक्षण
  3. टीम ने फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करवाई

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मोक्षदायिनी शिप्रा नदी की वर्तमान स्थिति को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। नदी की दयनीय हालत का जायजा लेने पहुंची एनजीटी की विशेष संयुक्त जांच टीम ने त्रिवेणी संगम से लेकर भैरवगढ़ क्षेत्र तक का विस्तृत निरीक्षण किया।

इस दौरान टीम ने न केवल नदी में मिल रहे गंदे नालों को देखा, बल्कि तटों पर मशीनों से काटे जा रहे वर्षों पुराने पेड़ों और जलीय प्रदूषण पर भारी नाराजगी जताई।

उज्जैन के प्रमुख घाटों पर स्थिति चिंताजनक

जांच दल ने पाया कि उज्जैन के प्रमुख घाटों पर स्थिति चिंताजनक है। टीम को कई स्थानों पर नदी के शुद्ध जल में सीधे मिलता हुआ मल-मूत्र और सीवरेज का पानी दिखाई दिया। भैरवगढ़ क्षेत्र और सिद्धवट के समीप 50 साल से भी अधिक पुराने छायादार पेड़ों को मशीनों से काटा जा रहा है, जिस पर टीम ने साक्ष्य एकत्रित किए।


स्टॉपडैम और रिटेनिंग वाल के कार्यों का भी निरीक्षण

कान्ह नदी का दूषित पानी रोकने के लिए बनाए जा रहे स्टॉपडैम और रिटेनिंग वाल के कार्यों का भी बारिकी से निरीक्षण किया। एनजीटी की भोपाल बेंच के निर्देश पर गठित इस दल में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अधिकारी शामिल थे।

टीम ने फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करवाई

टीम ने त्रिवेणी घाट, गऊघाट, रामघाट और दत्त अखाड़ा जैसे प्रमुख स्थलों की एक-एक हिस्से की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी करवाई है, ताकि ट्रिब्यूनल के समक्ष पुख्ता रिपोर्ट पेश की जा सके।

यह भी पढ़ें- ‘भव्य रिवर फ्रंट’ के रूप में विकसित होंगे शिप्रा नदी के तट, 64 करोड़ रुपए होंगे खर्च, 18 माह में संवारने की योजना

10 मार्च को होगी सुनवाई

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के लिए शिप्रा शुद्धीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च करने की योजना है, लेकिन धरातल पर नदी की स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है। प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि एनजीटी द्वारा गठित टीम ने मौके का मुआयना कर लिया है और वे अपनी रिपोर्ट सीधे ट्रिब्यूनल को सौंपेंगे। इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 10 मार्च को होनी है।