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उज्जैन में आस्था के बाद स्वच्छता का संकल्प, शनैश्चरी अमावस्या पर छोड़ी गई सामग्री को जरूरतमंदों तक पहुंचाएंगे

सफाई के दौरान छोड़े गए कपड़े, जूते-चप्पल और अन्य सामग्री अलग-अलग एकत्र की गई। जेसीबी, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रालियों की मदद से कचरा और सामग्री ट्रांसफर स्...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 02:43:08 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 02:53:35 PM (IST)
उज्जैन में आस्था के बाद स्वच्छता का संकल्प, शनैश्चरी अमावस्या पर छोड़ी गई सामग्री को जरूरतमंदों तक पहुंचाएंगे
शनैश्चरी अमावस्या के स्नान के बाद शिप्रा किनारे त्रिवेणी घाट की सफाई करने शनिवार देर रात घाट पर पहुंचे निगमकर्मी।

HighLights

  1. शनैश्चरी अमावस्या के बाद 90 से अधिक सफाई मित्रों ने संभाला मोर्चा
  2. त्रिवेणी घाट पर नगर निगम ने स्नान के लिए फव्वारों की व्यवस्था की थी
  3. यहां पर लोगों को नदी में उतरकर स्नान नहीं करने दिया गया

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। शनैश्चरी अमावस्या पर शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पर्व बीतने के बाद नदी के दो घाटों की तस्वीरें सामने आईं। रामघाट पर फूल-माला, पूजन सामग्री, प्लास्टिक और दूसरे कचरे की गंदगी अगले दिन देर सुबह तक फैली रही।

दूसरी ओर, त्रिवेणी घाट पर पर्व समाप्त होते ही सफाई शुरू कर दी गई और शनिवार देर रात तक घाट को स्वच्छ कर दिया गया। सफाई अभियान में एक ट्रक भर कचरा निकला। एक ही नदी के दो घाटों की ये तस्वीरें बताती हैं कि श्रद्धा के आयोजन के बाद स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाने में व्यवस्था का तरीका कितना अहम है।


रामघाट पर श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक फूल-माला और पूजन सामग्री नदी किनारे बिखरी रही। इनके साथ प्लास्टिक और अन्य कचरा भी जमा था। अगले दिन देर सुबह तक सफाई नहीं होने से घाट की स्थिति सवाल खड़े करती रही। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच शिप्रा की स्वच्छता केवल पर्व के दिन की व्यवस्था नहीं, बल्कि निरंतर निगरानी और समय पर सफाई का विषय है।

इसके विपरीत, त्रिवेणी घाट पर नगर निगम ने स्नान के लिए फव्वारों की व्यवस्था की थी। नदी और श्रद्धालुओं के बीच बैरिकेडिंग की गई और लोगों को नदी में उतरकर स्नान नहीं करने दिया गया। पर्व समाप्त होते ही 90 से अधिक सफाई मित्रों ने मोर्चा संभाला।

अभियान शनिवार रात से रविवार सुबह तक चला। सफाई के दौरान छोड़े गए कपड़े, जूते-चप्पल और अन्य सामग्री अलग-अलग एकत्र की गई। जेसीबी, डंपर और ट्रैक्टर-ट्रालियों की मदद से कचरा और सामग्री ट्रांसफर स्टेशन पहुंचाई गई।

कपड़े-जूतों से उपयोगी सामग्री बनाने की योजना

नगर निगम की योजना है कि उपयोग योग्य कपड़े और जूते-चप्पल थ्री-आर केंद्र में रखे जाएं, जहां से उन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सके। अनुपयोगी कपड़ों से फाइल कवर और जूते-चप्पलों से आरडीएफ यानी ईंधन तैयार करने की योजना है। हालांकि, इस पहल की सफलता का आकलन तभी होगा, जब यह स्पष्ट हो कि कितनी सामग्री दोबारा उपयोग में आई, कितना हिस्सा ईंधन बनाने भेजा गया और शेष का सुरक्षित निस्तारण कैसे हुआ।

सिंहस्थ से पहले चुनौती केवल घाटों को साफ करने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाने की है, जिसमें श्रद्धालुओं की आस्था नदी के लिए गंदगी का कारण न बने। त्रिवेणी की रातोंरात सफाई इसका एक उदाहरण है, जबकि रामघाट की तस्वीर समय पर कार्रवाई की जरूरत याद दिलाती है।

सबक : आस्था के साथ स्वच्छता भी जरूरी

  • पूजन सामग्री नदी में न डालें : फूल-माला और अन्य सामग्री निर्धारित पात्रों में ही डालें।
  • कपड़े-जूते घाट पर न छोड़ें : इन्हें साथ ले जाएं या निर्धारित स्थान पर रखें।
  • प्लास्टिक से बचें : पूजा और स्नान के दौरान एकल उपयोग वाली प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें।
  • अपनी जिम्मेदारी निभाएं : घाट को साफ रखना केवल नगर निगम नहीं, हर श्रद्धालु की भी जिम्मेदारी है।

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