
Pandit Pradeep Mishra Katha: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। बड़नगर रोड पर शिव महापुराण कथा के आखिरी दिन कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिप्रा की स्वच्छता के लिए संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि शिप्रा को स्वच्छ रखने के लिए निर्माल्य का विसर्जन नहीं करें। दीपदान भी शिप्रा के जल में नहीं बल्कि घाटों पर होना चाहिए।
उन्होंने महापौर से कहा कि उज्जैन में घरों से निकलने वाले पूजन पाठ का निर्माल्य एकत्र करने के लिए निर्माल्य वाहन चलाएं। ऐसे वाहन देशभर में चलने चाहिए। श्री विट्ठलेश सेवा समिति द्वारा सीहोर में इस प्रकार की वाहन सेवा शुरू की जाएगी। इस प्रकार की सेवा शुरू करने वाले लोगों को सम्मान भी किया जाएगा।
पं.मिश्रा ने कथा पंडाल में बैठी महिलाओं से आह्वान किया कि सप्ताह में एक दिन अपने मंदिर व घर के आसपास पेड़ों के नीचे रखी खंडित मूर्ति, भगवान की तस्वीर एकत्र कर एक निश्चित स्थान पर समाधिस्त करें, ताकि सनातन हिन्दू धर्म के देवी देवताओं का अपमान ना हो।
महाकाल मंदिर की व्यवस्था पर दूसरे दिन भी कसा तंज
पं.मिश्रा ने कथा की पूर्णाहुति पर बारह ज्योतिर्लिंगों का महत्व बताया। कथा के दौरान उन्होंने देश के मंदिरों की दर्शन व्यवस्था का वर्णन भी किया। साथ ही महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था पर लगातार दूसरे दिन भी तंज कसते हुए कहा कि महाकाल मंदिर ही है जहां भक्तों को धक्के दिए जाते हैं।
मुल्लापुरा का नाम अब मुरली पुरा होगा
कथा संपन्न होने पर अभार प्रकट करते हुए महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि जिस पवित्र स्थान पर शिव महापुराण कथा हुई है, उसका नाम बदल दिया गया है। अब मुल्लापुरा मुरलीपुरा के नाम से जाना जाएगा।
खुले वाहन में अभिवादन करते निकले कथा वाचक
कथा के बाद पं.मिश्रा खुले वाहन में सवार होकर जनता का अभिवादन स्वीकार करते हुए निकले। उन्हें देखने के लिए मार्ग के दोनों और हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।