नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि पर बुधादित्य व शश योग की साक्षी में महालय श्राद्ध का आरंभ हो गया है। पंचांगीय गणना के अनुसार प्रतिपदा तिथि का क्षय होने से इस बार श्राद्ध पक्ष सोलह की बजाय 15 दिन का रहेगा।
श्राद्ध पक्ष में पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान आदि का विशेष महत्व है। उज्जैन में पितृकर्म करने से व्यक्ति को गया से अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसी मान्यता के चलते देशभर से श्रद्धालु गयाकोठा, सिद्धवट व रामघाट पर तीर्थश्राद्ध करने पहुंच रहे हैं।
उज्जैन के गयाकोठा का उल्लेखन स्कंद पुराण में भी मिलता है। यहां पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और पूजन का बिहार के गया जी जितना ही महत्व माना गया है। यहां पर उज्जैन के 84 महादेव में से एक जटेश्वर महादेव भी हैं। मान्यता है कि इनके पूजन करने से पितरों की कृपा आप पर बनी रहती है।
ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया बुधवार से महालय श्राद्ध की विधिवत शुरुआत हो गई है। ग्रह गोचर गणना से देखें तो इस बार श्राद्ध पक्ष पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, बुधवार का दिन और मीन राशि के चंद्रमा की साक्षी में आरंभ हुआ। ग्रहों में बुधादित्य और शश योग विद्यमान रहा।
इस योग में श्राद्ध का आरंभ अच्छा माना जाता है। इस प्रकार के योग में पितरों की आशा तृष्णा अपने अग्रजों से बढ़ जाती है, इसलिए व्यक्ति को अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।
इस बार सोलह दिवसीय श्राद्ध पक्ष में प्रतिपदा तिथि का क्षय है। तिथि क्षय होने के कारण पूर्णिमा व प्रतिपदा के श्राद्ध को लेकर असमंजस की स्थिति निर्मित हो रही थी। ज्योतिष गणना और तिथि के अध्ययन को दृष्टिगत रखें तो महालय श्राद्ध के पहले दिन दोपहर 12 बजे तक पूर्णिमा का श्राद्ध है तथा दोपहर 12 बजे बाद प्रतिपदा का श्राद्ध करें, 1:30 बजे तक प्रतिपदा का श्राद्ध है। उसके बाद तिथि के क्षय का आरंभ होगा, जिसमें श्राद्ध नहीं किए जाते। इसमें अधिक सोचने की आवश्यकता नहीं है यह शास्त्र सम्मत मत है।