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उज्जैन को मीट-फ्री जोन बनाने की तैयारी, शहर सीमा से बाहर शिफ्ट हो सकती हैं मांस की दुकानें

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मांस की दुकानों को शहर सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की पहल के बाद अब महाकाल नगरी उज्जैन में भी इस दिशा में कदम उठाए जा रह...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 08 Jun 2026 09:18:15 PM (IST)Updated Date: Mon, 08 Jun 2026 09:18:15 PM (IST)
उज्जैन को मीट-फ्री जोन बनाने की तैयारी, शहर सीमा से बाहर शिफ्ट हो सकती हैं मांस की दुकानें
महापौर ने आयुक्त से एमआइसी के समक्ष प्रस्ताव लाने को कहा।

HighLights

  1. उज्जैन में भी मीट की दुकानें शहर से बाहर शिफ्ट करने की तैयारी
  2. महापौर ने आयुक्त से एमआइसी के समक्ष प्रस्ताव लाने को कहा
  3. वाराणसी की कूट तर्ज पर उज्जैन में बनेगी नई धार्मिक परिधि नीति

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मांस की दुकानों को शहर सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की पहल के बाद अब महाकाल नगरी उज्जैन में भी इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। महापौर मुकेश टटवाल ने नगर निगम आयुक्त को नीति-नियमों के अनुसार प्रस्ताव तैयार कर महापौर परिषद (एमआइसी) के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। महापौर का कहना है कि वे शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए मांस की दुकानों को शहरी सीमा से बाहर स्थानांतरित करने के पक्ष में हैं।

उज्जैन देश की प्रमुख धार्मिक और पर्यटन नगरी है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान महाकालेश्वर के दर्शन और शिप्रा नदी में स्नान के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह नगर होने के साथ ही यहां सिंहस्थ-2028 की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में शहर की धार्मिक छवि और पवित्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।


लाइसेंस और वर्तमान स्थिति

वर्तमान में शहर में 400 से अधिक मटन-चिकन की दुकानें और होटल संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या के पास वैध लाइसेंस नहीं होने की बात भी सामने आती रही है। महाकाल मंदिर से करीब 500 मीटर दूर तोपखाना और आसपास के क्षेत्रों में मांस विक्रय का कारोबार संचालित होता है। पूर्व में प्रशासन मंदिर के 200 मीटर दायरे से मांस और अंडे की कई दुकानें हटवा चुका है तथा व्यापारियों को मांस ढंककर बेचने के निर्देश दिए गए थे।

अब महापौर के रुख से संकेत मिल रहे हैं कि केवल ढंककर बिक्री की व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जाएगी और शहर के भीतर संचालित दुकानों के स्थानांतरण पर गंभीरता से विचार किया सकता है। मंगलवार को होने वाली एमआइसी बैठक में इस विषय पर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।

सिंहस्थ-2028 को लेकर बन सकती है नई नीति

महाकाल लोक के विकास के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए प्रशासन और नगर नियोजन से जुड़े विशेषज्ञ धार्मिक एवं पर्यटन क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक नीति पर विचार कर रहे हैं। इसके तहत शहर के प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों के आसपास विशेष पवित्र परिधि निर्धारित कर मांस और मछली के क्रय-विक्रय को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव सामने आ सकता है।

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धर्माचार्यों और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कुछ लोगों का मत है कि महाकाल नगरी की धार्मिक पहचान को देखते हुए मुख्य शहर को मीट-फ्री जोन बनाया जाना चाहिए। मीट व्यापारियों का कहना है कि यदि उन्हें शहर से बाहर स्थानांतरित किया जाता है तो प्रशासन को उनके लिए वैकल्पिक स्थान, बुनियादी सुविधाएं और व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराना होगा, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।