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उज्जैन में 33 लोकेशन पर प्रापर्टी के रेट में 100 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाने का प्रस्ताव, सिंहस्थ से पहले रियल एस्टेट में बड़ा बदलाव

उज्जैन जिले की कुल 4353 लोकेशन में से 3229 स्थानों पर दरों में वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें शहरी क्षेत्र की 1665 और ग्रामीण क्षेत्र की...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 18 Mar 2026 02:17:27 PM (IST)Updated Date: Wed, 18 Mar 2026 02:25:34 PM (IST)
उज्जैन में 33 लोकेशन पर प्रापर्टी के रेट में 100 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाने का प्रस्ताव, सिंहस्थ से पहले रियल एस्टेट में बड़ा बदलाव
उज्जैन में बढ़ने वाले हैं प्रापर्टी के रेट। फाइल फोटो

HighLights

  1. शहरी क्षेत्रों में औसतन 12.96 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 21.38 प्रतिशत बढ़ोतरी की जा रही है
  2. शहर के साथ-साथ ग्रामीण और परिधीय क्षेत्रों में भी जमीन की मांग तेजी से बढ़ रही है
  3. सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में 13,534 करोड़ रुपये के विकास कार्य चल रहे हैं

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। उज्जैन, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह नगर होने के साथ 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ की मेजबानी की तैयारी में जुटा है, अब रियल एस्टेट के बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, नई सड़कों, पुलों, मेडिकल कॉलेज और आईटी पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स के बीच जिला प्रशासन ने प्रापर्टी गाइडलाइन दरों में औसतन 17.18 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है।

यह वृद्धि केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि उस तेजी से बदलते भूगोल और बढ़ती मांग का संकेत है, जो उज्जैन को राष्ट्रीय स्तर पर एक नए शहरी माडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए नई दरों के प्रस्तावों पर विस्तार से मंथन किया गया।


बैठक में विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा सहित सभी तहसीलों के राजस्व अधिकारी मौजूद रहे। जिले की कुल 4353 लोकेशन में से 3229 स्थानों पर दरों में वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें शहरी क्षेत्र की 1665 और ग्रामीण क्षेत्र की 1564 लोकेशन शामिल हैं।

प्रस्तावित वृद्धि के अनुसार शहरी क्षेत्रों में औसतन 12.96 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 21.38 प्रतिशत बढ़ोतरी की जा रही है। इससे साफ है कि शहर के साथ-साथ ग्रामीण और परिधीय क्षेत्रों में भी जमीन की मांग तेजी से बढ़ रही है। तहसीलवार विश्लेषण में उज्जैन में 1189, तराना में 507, खाचरौद में 356, महिदपुर में 346, बडनगर में 321, नागदा में 310 और घट्टिया में 200 लोकेशन पर दरों में इजाफा प्रस्तावित है।

33 लोकेशनों पर 100 प्रतिशत तक वृद्धि

उज्जैन जिले में 33 लोकेशन ऐसी चिन्हित की गई हैं, जहां 100 प्रतिशत या उससे अधिक वृद्धि का प्रस्ताव है। इनमें रत्नाखेड़ी, दताना, मंगरोला, लिम्बापिपलिया, तिरुपति ग्रांड कालोनी और नागदा का जवाहर मार्ग प्रमुख हैं। वहीं शहर के भीतर महाकाल मार्ग, दशहरा मैदान, वजीर पार्क, दवा बाजार और ग्रैंड रतन एवेन्यू जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी दरों में वृद्धि प्रस्तावित की गई है।

40 नई कॉलोनियां गाइडलाइन में शामिल

40 नई कॉलोनियों को गाइडलाइन में शामिल किया गया है, जिनमें उज्जैन तहसील की 29 कॉलोनियां प्रमुख हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि की दरों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है, जहां कई स्थानों पर 50 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित है। दरअसल, सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में 13,534 करोड़ रुपये के विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं।

इनमें 276 किमी लंबी 52 सड़कों का चौड़ीकरण, 304 किमी लंबी 26 नई सड़कों का निर्माण और 19 नए पुल व आरओबी शामिल हैं। इन परियोजनाओं के कारण शहर का विस्तार और कनेक्टिविटी बेहतर हो रही है, जिससे रियल एस्टेट बाजार में उछाल स्वाभाविक माना जा रहा है। प्रशासन ने गाइडलाइन की अंतिम दरों पर आमजन से सुझाव और आपत्तियां 22 मार्च तक आमंत्रित किए हैं। इसके बाद अंतिम प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा।

बढ़ती दरों में अवसर भी, चुनौती भी

गाइडलाइन दरों में वृद्धि से जमीन मालिकों और निवेशकों को सीधे लाभ मिलता है, साथ ही शहर की आर्थिक गतिविधियां तेज होती हैं। लेकिन इसके समानांतर आम नागरिकों के लिए घर खरीदना महंगा हो जाता है। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री खर्च बढ़ने से मध्यम वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है, जबकि नए खरीदारों की पहुंच सीमित होती है।