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युवाओं के भरोसे ही आएगा रामराज्य, उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में बोले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

युवा धर्म संसद में शनिवार को युवाओं पर भरोसे और रामराज का संदेश गूंजा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का प्रसंग उद्धृ...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 19 Sep 2026 08:14:12 PM (IST)Updated Date: Sat, 19 Sep 2026 08:14:12 PM (IST)
युवाओं के भरोसे ही आएगा रामराज्य, उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में बोले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
युवा धर्म संसद को संबोधित करते मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव। -नईदुनिया

HighLights

  1. दिया महर्षि विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण का उदाहरण
  2. कहा-जहां चुनौतियां होंगी वहीं जय-जयकार मिलेगी
  3. वही भरोसा मुझे भी है, युवाओं के भरोसे ही रामराज आएगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : युवा धर्म संसद में शनिवार को युवाओं पर भरोसे और रामराज का संदेश गूंजा। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का प्रसंग उद्धृत करते हुए कहा कि महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ से बड़ी सेना मांगने के बजाय केवल दो युवाओं- श्रीराम और लक्ष्मण पर भरोसा जताया था। वही भरोसा मुझे भी है, युवाओं के भरोसे ही रामराज आएगा।

मुख्यमंत्री उज्जैन के गीता भवन में सेवाज्ञ संस्थानम् द्वारा आयोजित तीन दिवसीय युवा धर्म संसद के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मंच संभालते ही कहा कि जब देश का युवा धर्म संसद में बैठता है तो सीना गर्व से 56 इंच का हो जाता है। ये 21वीं सदी का भारत है, जिसके युवाओं पर तो ऋषि-मुनियों को भी सदा से विश्वास रहा है।


सफलता बगैर कष्ट के नहीं मिलती

युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता बगैर कष्ट नहीं मिलती, जब चुनौतियां और परेशानियां आती हैं, तभी सफलता और जय-जयकार मिलती है। संसाधनों का अभाव कभी रुकावट नहीं बन सकता, यदि आपके पास अदम्य आत्मविश्वास और स्पष्ट लक्ष्य हो।

भारत आज दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है

भगवान श्रीराम ने भी विपरीत परिस्थितियों में अपने आत्मविश्वास से ही इतिहास रचा था। दुनिया भी भारत को धीरे-धीरे समझ रही है और भारत आज दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम को युवा धर्म संसद के संरक्षक आचार्य मिथिलेशनंदिनी शरण महाराज ने भी संबोधित किया। उन्होंने अगली युवा धर्म संसद सितंबर- 2027 में द्वारिका में होने की घोषणा की। सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय सचिव माधव कुमार तिवारी, उद्यमी सचिन बंसल मंचासीन थे। मंच पर आभार अध्यक्ष आशीष आशु ने माना।

21वीं सदी भारत की, दुनिया में बजा डंका

सीएम ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति की धारा हजारों-लाखों वर्षों से अविरल बहती आ रही है। दुनिया भले ही भारत को समझने में थोड़ा समय ले रही हो, लेकिन 21वीं शताब्दी पूरी तरह भारत की है और आज हम दुनिया के सामने सीना चौड़ा करके आगे बढ़ रहे हैं।

सांदीपनि की धरा से सीख: ‘मित्र की मदद ऐसे करो कि उसे कभी नीचा न देखना पड़े’

उज्जैन की आध्यात्मिक महत्ता बताते हुए सीएम ने कहा कि यह सांदीपनि आश्रम की वह पावन भूमि है, जहां श्री कृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता परवान चढ़ी थी। युवाओं को सीख देते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल-कॉलेज की दोस्ती जीवन भर की धरोहर होती है। जीवन में कभी मित्र को मदद की ज़रूरत पड़े, तो सहायता इस प्रकार गुप्त रूप से (पीठ पीछे) करें कि उसके स्वाभिमान पर आंच न आए और उसे कभी शर्मिंदा न होना पड़े।

‘पूरे 100 पैसे’ पहुंचाने वाले ‘चाय वाले’ पीएम का दौर

राजनीतिक परिदृश्य पर बात करते हुए सीएम ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान पर कटाक्ष किया, जिसमें उन्होंने माना था कि "दिल्ली से भेजा एक रुपया जनता तक पहुंचते-पहुंचते महज़ 15 पैसे ही रह जाता है।’ सीएम ने कहा कि वह 85 पैसे की दलाली वाला दौर था। आज देश की कमान ‘चाय वाले’ पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों में है, जिन्होंने पारदर्शी व्यवस्था से 100 का 100 पैसा सीधे खाते में पहुंचाकर दिखाया है।

कृतज्ञता ही मनुष्यता की पहचान : आचार्य मिथिलेशानंदिनी शरण

आचार्य मिथिलेशानंदिनी शरण ने कहा कि ‘अधर्म और असमानता से सत्ता और समाज का संतुलन बिगड़ता है। द्रुपद की एक चूक ने द्रोणाचार्य जैसे तपस्वी आचार्य को कुरु-कुल की सीमाओं में बांध दिया था। व्यक्ति जब चूकता है तो प्रभाव सीमित रहता है, लेकिन जब सत्ता चूकती है तो परिणाम विभीषिका बन जाते हैं।

भारत का गौरव उसकी ज्ञान परंपरा और गुरुकुल संस्कृति में निहित है। युवा धर्म संसद का मुख्य उद्देश्य केवल कोई आयोजन करना या नौकरी-स्टार्टअप पर चर्चा करना नहीं, बल्कि भारत के युवाओं को संवेदनशील, विचारशील और भारतीय मनुष्य-बोध के साथ गढ़ना है। महाकाल की कृपा से आगामी महाकुंभ का दायित्व मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव को मिलना संपूर्ण प्रदेश के लिए हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना के सत्कार का अनुपम सौभाग्य है।’

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