यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 15, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
साढ़े साती का मतलब कोर्ट में कर्मों की फाइल खुलना : दाती महाराज
शनिदेव न किसी के मित्र हैं और ना ही शत्रु। वे तो न्यायाधिपति हैं।
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Publish Date: Sun, 15 May 2016 09:21:05 PM (IST)Updated Date: Mon, 16 May 2016 07:46:17 AM (IST)

राजेंद्र राठौर, उज्जैन। शनिदेव न किसी के मित्र हैं और ना ही शत्रु। वे तो न्यायाधिपति हैं। साढ़े साती का मतलब है न्यायाधिपति की कोर्ट में आपके कर्मों की फाइल खुलना। अगर कर्म अच्छे हैं तो सब अच्छा होगा और बुरे तो बुरा। इसलिए साढ़े साती या ढैया से डरने की जरूरत नहीं। बस अच्छे कर्म करिए। कुछ भी अहित नहीं होगा।
यह कहना है शनिदेव के भक्त दाती महाराज का। उन्होंने कहा कि शनि, कर्म, धर्म, गति व शुभ देने वाले ग्रह हैं। यदि जीवन में कर्म बुरे किए हैं तो सजा भुगतने के लिए तैयार रहें। कोई पूजा पाठ या तेल चढ़ावा काम नहीं आने वाला है, क्योंकि महाराज की अदालत में न्याय कर्म के आधार पर ही होता है। शनि उन भक्तों को पसंद करते हैं, जो राष्ट्र और नारी का सम्मान करें। माता-पिता की सेवा करें व कुकर्मों से दूर रहें। ऐसे भक्त ही शनि को प्यारे लगते हैं।
मां को पानी नहीं पिलाया तो शनिदेव कैसे खुश होंगे
दाती महाराज ने कहा, अगर आप शनिदेव को नियमित रूप से तेल चढ़ाते हैं और अपनी मां को पानी तक का नहीं पूछते तो शनिदेव खुश होंगे क्या, बिल्कुल भी नहीं। कर्म बुरा है तो दंड जरूर मिलेगा। इसलिए पहले माता-पिता की सेवा करें।
नाल मिले तो पौ बारह और खरीदकर लाए तो...
दाती महाराज के अनुसार आपको भाग्य से घोड़े की नाल कहीं पड़ी मिल जाए तो यह अच्छा है, लेकिन नाल खरीदना गलत है। घोड़े की नाल के नाम पर कथित लोगों ने गोरखधंधा चला रखा है। लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। इसे रोकना चाहिए। क्योंकि नाल बार-बार लगाने से घोड़े को खासी तकलीफ होती है। ऐसी नाल किसी की किस्मत नहीं खोल सकती। उलटा नुकसान ही होगा।
उज्जैन की बेटियों को देंगे नि:शुल्क शिक्षा
दाती महाराज बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को प्रमुखता से आगे बढ़ा रहे हैं। उज्जैन में भी करीब 700 छात्राओं को आवासीय शिक्षा देने की तैयारी की जा रही है। इसकी शुरुआत अंबोदिया मार्ग पर कर दी गई है।