Sharadiya Navratri 2021: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शक्तिपीठ हरसिद्धि देश के 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है यहां माता सती की सीधे हाथ की कोहनी गिरी थी। मंदिर में देवी की मूर्ति श्रीयंत्र पर विराजित है। इस मंदिर में देवी की साधना करने से साधकों को शीघ्रता से हर प्रकार की सिद्धि प्राप्त हो जाती है। इसलिए इस शक्तिपीठ का नाम हरसिद्धि है।
हरसिद्धि उज्जयिनी के सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी
ज्योतिर्विद पं.आनंदशंकर व्यास के अनुसार माता हरसिद्धि उज्जयिनी के सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी हैं। किंवदंतियों के अनुसार राजा विक्रमादित्य इस मंदिर में नित्य देवी की आराधना करने आते थे। कालांतार में भी यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है।
संध्या आरती विशेष मानी जाती है
शक्तिपीठ हरसिद्धि में संध्या आरती विशेष मानी जाती है। मान्यता है माता हरसिद्धि दिन में गुजरात के हरसद गांव स्थित मंदिर में निवास करती हैं तथा शाम को रात्रि विश्राम के लिए उज्जैन आती हैं। इसलिए प्रतिदिन संध्या आरती के सैकड़ों भक्त माता के दर्शन के लिए उमड़ते हैं। किंवदंतियों के अनुसार माता हरसिद्धि जब शाम को उज्जैन आती हैं, तो नवरात्रि में उनके स्वागत में दीपमालिका प्रज्वलित की जाती हैं।
देवी के दरबार में दीपमालिका प्रज्वलित होती है
भक्त मान्यता पूरी होने पर भी देवी के दरबार में दीपमालिका प्रज्वलित कराते हैं। दीपमालिका मराठाकालीन है। इसमें दो दीप स्तंभ हैं, प्रत्येक स्तंभ में 501 दीपक हैं। मंदिर के प्रबंधक अवधेश जोशी ने बताया नवरात्र में भक्तों की ओर से सामूहिक रूप से दीपमालिका प्रज्वलित की जाती है। सामूहिक रूप से दीपमालिका प्रज्वलित कराने के लिए प्रति व्यक्ति 3100 रुपये का खर्च आता है।