
उज्जैन। महाकाल मंदिर प्रबंध समिति द्वारा शिप्रा आरती की योजना पर मंदिर के पुजारी नाराज हो गए हैं। उनका कहना है कि मंदिर प्रबंध समिति अपनी सीमा से बाहर जाकर व्यय ना करे। उधर तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि मंदिर समिति अपना काम करे। तीर्थ की पूजन परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं किया जाए। मामले में अधिकारियों का कहना है कि माता शिप्रा की आरती भव्य रूप से होना चाहिए। इसमें मंदिर प्रबंध समिति की मंशा केवल सहयोग करने की है।
शिप्रा स्वच्छता अभियान से जन-जन को जोड़ने के उद्देश्य से महाकाल मंदिर प्रबंध समिति मोक्षदायिनी के रामघाट स्थित महाकाल पेढ़ी पर शिप्रा आरती की योजना बना रही है। मंगलवार को आरती के धार्मिक पक्षों की जानकारी व सहमति जुटाने के लिए मंदिर प्रशासन ने पंडेपुजारियों की बैठक बुलाई। इसमें अधिकारियों को पंडे-पुजारियों के विरोध का समाना करना पडा।
पंडे-पुजारियों ने समिति को मंदिर की सीमा से बाहर जाकर दान के पैसे का उपयोग नहीं करने की सलाह दी। उधर, योजना की जानकारी लगते ही तीर्थ पुरोहित भड़क गए। श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पं.राजेश त्रिवेदी ने बताया पंडा समिति पहले से ही महाकाल पेढ़ी पर प्रतिदिन शिप्रा आरती करती है।
आगामी दिनों में इसे भव्य रूप देने का प्रयास किया जाएगा। देव स्थल तथा तीर्थ की पूजन परंपरा पुरातन पद्धति से संचालित होती है। इसमें किसी को भी हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अगर मंदिर समिति ऐसा प्रयास करेगी, तो तीर्थ पुरोहित इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
उज्जैन की पहचान बने शिप्रा आरती
मामले में मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष व कलेक्टर कवींद्र कियावत का कहना है कि शिप्रा आरती को मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। मंदिर समिति का उद्देश्य पूजन परंपरा में हस्तक्षेप का नहीं, बल्कि शिप्रा आरती को उज्जयिनी की पहचान बनाकर शिप्रा स्वच्छता अभियान से जन-जन को जोड़ने का है। आरती भव्य रूप से होनी चाहिए। मंदिर प्रबंध समिति इसमें सहयोग करेगी।