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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

त्रिवेणी, गऊघाट और रामघाट स्टापडैम के गेट खोल शिप्रा से गंदा पानी आगे बहाया

उज्जैन (नईदुनिया उज्जैन)। शनिश्चरी अमावस्या (4 दिसम्बर) पर श्रद्धालुओं को नर्मदा- क्षिप्रा के शुद्ध संगम जल में स्नान कराने के लिए तीन स्तर पर तैयारी ...और पढ़ें

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Sun, 28 Nov 2021 11:29:07 PM (IST)Updated Date: Sun, 28 Nov 2021 11:29:07 PM (IST)
त्रिवेणी, गऊघाट और रामघाट स्टापडैम के गेट खोल शिप्रा से गंदा पानी आगे बहाया

उज्जैन (नईदुनिया उज्जैन)। शनिश्चरी अमावस्या (4 दिसम्बर) पर श्रद्धालुओं को नर्मदा- क्षिप्रा के शुद्ध संगम जल में स्नान कराने के लिए तीन स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। त्रिवेणी, गऊघाट और रामघाट स्टापडैम के गेट खोल शिप्रा के आंचल में भरा गंदा पानी आगे बहा दिया गया है। दूसरा, पाइपलाइन के जरिये नर्मदा का शुद्ध जल शिप्रा में लाया जा रहा है और तीसरा, कान्ह का प्रदूषित पानी स्नान क्षेत्र में ना मिले, इसके लिए पिछले वर्ष की तरह त्रिवेणी घाट के पास मिट्टी का कच्चा बांध बनाना शुरू कर दिया है।

मालूम हो कि इंदौर शहर का सीवरेज, कान्ह नदी के जरिए उज्जैन आकर पवित्र शिप्रा नदी में मिलता है। इससे शिप्रा का शुद्ध जल भी दूषित हो जाता है। श्रद्धालुओं को पर्व स्नान इस दूषित जल में न करना पड़े, इसके लिए पांच साल पहले शासन ने 95 करोड़ रुपये की कान्ह डायवर्शन योजना स्वीकृत की थी। इसके राघौपिपल्या गांव से कालियादेह पैलेस तक भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई थी। इस पर 95 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। इसी दरमियान इंदौर में सीवरेज पानी के उपचार के लिए ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई थी। जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने कहा गया था कि वर्षाकाल (जून से सितंबर) को छोड़ शेष 8 माह में कभी भी नहान क्षेत्र (त्रिवेणी से कालियादेह) के बीच शिप्रा में कान्ह का पानी नहीं मिलेगा। मगर ऐसा हुआ नहीं। कभी पाइपलाइन में लीकेज के कारण तो कभी कान्ह नदी में उफान के कारण दिसंबर माह तक, और कभी कभी तो मार्च-अप्रैल तक कान्ह का दूषित पानी शिप्रा में मिलता रहा। हां, नहान क्षेत्र में इस मिलन को रोकने लिए जल संसाधन विभाग हर साल जनवरी से पहले त्रिवेणी के पास कच्चा बांध जरूर बनाता रहा, मगर ये व्यवस्था भी एक-दो स्नान के बाद ध्वस्त होती रही।


कच्चे बांध के लिए 20 लाख रुपये से ज्यादा खर्च

सिंहस्थ- 2016 बाद से हर साल जल संसाधन विभाग, त्रिवेणी घाट के पास गोठड़ा में कच्चा मिट्टी का बांध बना रहा है। हर बार बांध बनाने में 20 से 25 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। यानी अब तक 1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इस वर्ष भी 20 लाख रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। जानकारों का कहना है कि यहां स्थायी बांध बना देना चाहिए। इसके लिए जनप्रतिनिधियों और अफसरों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। इस संबंध में 5 से 7 मीटर ऊंचा और 80 मीटर लंबा बांध बनाने के लिए 4 करोड़ 72 लाख रुपये का प्रस्ताव शासन को पिछले वर्ष भेजा भी जा चुका था।

नर्मदा का 2 एमसीएम पानी आएगा

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का कहना है कि शनिश्चरी अमावस्या से पहले नर्मदा का 2 मिलियन क्यूबिक मीटर नर्मदा का पानी पाइपलाइन के जरिये शिप्रा में आ जाएगा। दो दिन पहले से पानी की आवक जारी है। पानी हरियाखेड़ी में बने पाइपलाइन के आउटलेट से शिप्रा में मिल रहा है। इस पानी की कीमत 22 रुपये 60 पैसे घन मीटर है। बीते सात वर्षों में 300 करोड़ रुपये का नर्मदा जल उज्जैन के लिए छोड़ा जा चुका है।