
अभिषेक चेंडके, उज्जैन। ये न पारंपरिक साधु हैं न संन्यासी। कोई तामझाम भी नहीं। फिर भी भीड़ ऐसी, जो सिंहस्थ के सेलिब्रिटी संतों को भी मात दे रही है। आशीर्वाद मांगने के लिए लंबी कतार, घंटेभर बाद करीब जाने का मौका। ये सब हो रहा है मेला क्षेत्र के एक कोने में लगे किन्नर अखाड़े में। महंगी कार में आने वाले से लेकर सिर पर पोटली रख कर आने वाला ठेठ गांव का बंदा यहां आशीर्वाद लेते देखा जा सकता है।
किन्नर को लेकर अमूमन यही आम धारणा रहती है कि तीज त्योहार, परिवार में शादी ब्याह, संतान होने पर नेग मांगने वाला एक समुदाय, लेकिन सिंहस्थ में इस अखाड़े की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। यहां आशीर्वाद पाने के लिए आने वाले खुद बरकत लेकर जा रहे हैं। कुछ ऐसे हैं इस अखाड़े के दृश्य-
1.गीता का सार और लंबी कतार
पंडाल में मानस भाई नया हरसूद वाले कथा बांच रहे हैं। वो भगवत गीता का का मर्म समझा रहे हैं लेकिन उसे समझने के लिए 50 से ज्यादा भक्त भी नहीं हैं। स्टेज के नीचे किन्नर पवित्रा सोफे पर विराजमान हैं और सामने पंडाल के दूसरे कोने को छूने वाली कतार। जो करीब जाता है, जेब में हाथ डाल कर श्रद्धा से एक नोट निकाल उनके हाथ में रखता है और आशीर्वाद मांग कर लौट जाता है। जो ज्यादा समय तक टिकने की कोशिश करता है, बाउंसर उन्हें उठाकर दूसरों को आगे आने का मौका दे देता है।
2. मेरी कोख सूनी है झोली भर दो
कतार में खड़ी एक महिला आशीर्वाद मांगने के बाद घुटनों के बल बैठ जाती है। रुआंसी होकर बोलती है, मेरी कोख सूनी है चार साल से...। किन्नर पवित्रा उसके आंचल में एक मुठ्ठी चावल भरती है और प्यार से माथे पर हाथ फेर कर कहती है- तेरे आंगन में भी फूल खिले। एक परिवार किन्नर की गोद में सालभर का बच्चा रख देता है। पिता कहते हैं माता इसे आशीर्वाद दो। किन्नर सोए शिशु के चेहरे पर हल्की फूंक मारती है, मुठ्ठी में एक सिक्का रखती है। बच्चा चौंक कर रोने लगता है। परिवार वाले मुस्कराकर शिशु को गोद में लेकर पंडाल से बाहर निकल जाते हैं।
भीड़ बढ़ी तो गेट पर रोकी इंट्री
शाम के छह बजे पंडाल में जरूरत से ज्यादा भीड़ हो जाती है। गेट पर तैनात गार्ड गेट पर बेरिकेड लगा देता है। एक परिवार कहता है मिलने दो हमें, बड़ी दूर से आए हैं। गार्ड कहता है, भीड़ कम होने तक इंतजार करो। जो लोग पंडाल के भीतर हैं या मंडरा रहे हैं, उन्हें बाउंसर "आइटेंटीफाई" कर बाहर निकालने में जुटे हैं। भीड़ के कारण गेट कनात से पैक हैं। जो भी गर्दन ऊंची कर झांकने की कोशिश करता है, उसे गार्ड की झिड़की मिल रही है- चलो जाओ यहां से..क्या रखा है यहां।
काली साड़ी में महिला बाउंसर
ज्यादा भीड़ होने से किन्न्र अखाड़े ने एक सिक्युरिटी एजेंसी हायर की है। 15 बाउंसर पंडाल की सुरक्षा में हैं। इनमें काली साड़ी पहने पांच महिला बाउंसर भी शामिल हैं। इसके अलावा तीन गनमैन भी हैं, जो आवास क्षेत्र, मंदिर और मेनगेट पर तैनात हैं। अखाड़े का मैनेजमेंट देख रही पवित्रा बताती हैं कि हम शाम के समय सांस्कृतिक आयोजन भी करना चाहते हैं, लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा हो रही है कि हमेें उसे कैंसल करना पड़ा। पुलिस विभाग से भी और पुलिस जवान तैनात करने की मांग की है।