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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ujjain Boudh Stupa News: नरवाई की आग बाैद्ध स्तूप तक पहुंची, अंतरराष्ट्रीय स्मारक को पहुंच रहा नुकसान

अंतरराष्ट्रीय स्मारक को नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय प्रशासन व पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नई दिल्ली के जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है।

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Mon, 18 Apr 2022 10:34:27 PM (IST)Updated Date: Tue, 19 Apr 2022 10:18:38 AM (IST)
Ujjain Boudh Stupa News: नरवाई की आग बाैद्ध स्तूप तक पहुंची, अंतरराष्ट्रीय स्मारक को पहुंच रहा नुकसान

Ujjain Boudh Stupa News: उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। प्रतिबंध के बावजूद प्रदेश में किसान खेत की नरवाई में आग लगा रहे हैं। दो दिन पहले कानीपुरा वैश्य टेकरी के आसपास खेतों में नरवाई जलाई गई। नरवाई की आग प्राचीन बौद्ध स्तूप तक पहुंच गई। बताया जाता है आग से अंतरराष्ट्रीय स्मारक को नुकसान पहुंच रहा है। स्थानीय प्रशासन व पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नई दिल्ली के जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है।

इतिहासकार बताते हैं कि अशोक मोर्य अपने शासन काल में उज्जैन से लेकर अरब सागर तक करीब 84 हजार बौद्ध स्तूप का निर्माण किया था। इसमें कानीपुरा स्थित बौद्ध स्तूप सबसे प्राचीन व बड़ा है। करीब 100 फीट ऊंचाई तथा 350 फीट व्यास के स्तूप में भीतर मोटी-मोटी ईंट तथा लकड़ी के पाट लगे हुए हैं। इसमें आसंदी व चंवर भी रखे हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नई दिल्ली द्वारा बौद्ध स्तूप का संरक्षण किया जा रहा है। विभाग ने यहां एक गार्ड भी नियुक्त कर रखा है। बावजूद इसके अंतरराष्ट्रीय स्मारक की अनदेखी हो रही है। बताया जाता है आसपास के किसान प्रतिवर्ष फसल बोने के लिए जमीन की जुताई करते हैं, इससे टेकरी के व्यास को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। गेहूं की फसल के बाद किसान नरवाई जला देते हैं, इससे स्तूप की टेकरी तक आग पहुंचती है।


थाइलैंड के धर्मावलंबियों ने दिया जीर्णाेद्धार का प्रस्तावः करीब एक पखवाड़े पहले थाईलैंड से कुछ बौद्ध धर्मावलंबी कानीपुरा पहुंचे थे। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को बौद्ध स्तूप के संरक्षण व जीर्णाेद्धार का प्रस्ताव दिया है।

1937-38 में हुई थी खुदाईः कानीपुरा स्थित बौद्ध स्तूप को संरक्षित करने के लिए सन् 1937-38 में ग्वालियर स्टेट के एमबी गर्दे के नेतृत्व में खुदाई की गई थी, लेकिन खुदाई में टेकरी के भीतर से निकली गैस के कारण खनिक बेहोश होने लगे, इसके बाद खुदाई का काम बंद कर दिया गया।

आस्था का बड़ा केंद्रः धर्मधानी उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल के कारण शैव तथा श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम के कारण वैष्णव संप्रदाय के धर्मानुयाइयों का बड़ा केंद्र है। अगर केंद्र व राज्य सरकार बौद्ध स्तूप का जीर्णोद्धार कराती है, तो यह विश्व के बौद्ध धर्मानुयाइयों के लिए आस्था के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।