
उज्जैन। सनातन धर्म परंपरा की प्राचीन गुरुकुल पद्धति में महाकाल की नगरी उज्जैन का विशिष्ट स्थान है। शास्त्रीय मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण यहां अध्ययन के लिए मथुरा से 5229 वर्ष पूर्व पैदल चलकर आए थे।
अंकपात क्षेत्र में स्थित सांदीपनि आश्रम में उन्होंने 64 दिन-रात में 64 कला और 16 विद्या का ज्ञान पाया। जानकार बताते हैं कि उस समय उन्हें शस्त्र, शास्त्र व धर्म सहित फर्नीचर से लेकर इत्र बनाने की विद्या गुरु श्रेष्ठ सांदीपनि ने दी थी। 5 हजार सालों के बाद भी यह आश्रम यहां प्राचीन गुरुकुल की याद दिलाता है।
फिलहाल आश्रम का प्रबंधन गुरु सांदीपनि कुल के वंशजों के हाथ में है। आज भी यहां भगवान को दिए गए ज्ञान के चित्र दीवारों पर अंकित हैं। किसी चित्र में देवकीनंदन फर्नीचर बनाते तो किसी में गुरु सांदीपनि से शास्त्र का ज्ञान लेते नजर आते हैं। श्रीकृष्ण के भक्त यहां आकर अभिभूत हो जाते हैं। वैष्णव संप्रदाय के भक्तों के लिए यह जगह शीर्ष तीर्थों में शामिल है। यहां महाप्रभुजी की 73वीं बैठक भी है।
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जानिए आश्रम में किन स्थलों के होते हैं दर्शन
गोमती कुंड : मान्यता है कि गुरु सांदीपनि अवंतिका से गोमती नदी में स्नान के लिए तत्कालीन लखनऊ जाते थे। भगवान कृष्ण ने जब यह देखा तो योगविद्या से तीर चलाकर आश्रम परिसर में ही कुंड में गोमती को प्रकट कर दिया। आज भी यह कुंड यहां स्थित है।
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कृष्ण-बलराम और सुदामा की बाल लीलाएं
आश्रम में भगवान कृष्ण, बलदाऊ सुदामा और उनके सखा सुदामा की बाल लीलाओं के चिह्न आज भी नजर आते हैं। तीनों की मूर्तियों की पूजा होती है। कई कथाएं भी तीनों के संबंधों को लेकर प्रचलित है। सांदीपनि आश्रम में स्थित कलादीर्घा में भक्तों को होते हैं श्रीकृष्ण की 64 कलाओं और 16 विद्या के दर्शन।
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शास्त्रीय मान्यता : सांदीपनि आश्रम में भगवान कृष्ण को 5 हजार साल पहले मिला 64 कला और 16 विद्या का ज्ञान।