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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 25, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उज्जैन मदरसों ने की मांग- हमारे लिए अलग हो मध्यान्ह भोजन व्यवस्था

उज्जैन की जिला मदरसा समिति ने मदरसों के लिए अलग मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था चाही है।

By Prashant PandeyEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Sun, 25 Aug 2019 08:36:30 AM (IST)Updated Date: Sun, 25 Aug 2019 08:43:36 AM (IST)
उज्जैन मदरसों ने की मांग- हमारे लिए अलग हो मध्यान्ह भोजन व्यवस्था

धीरज गोमे, उज्जैन। उज्जैन की जिला मदरसा समिति ने मदरसों के लिए अलग मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था चाही है। यह मांग पूरी की जाए या नहीं, इसके लिए जिला पंचायत ने प्रदेश शासन से अभिमत मांगा है। मौजूदा व्यवस्था अनुसार सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में केंद्रीयकृत किचन से ही भोजन उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

बता दें कि स्कूली बच्चों के पोषण आहर को उन्नत करने के लिए भारत सरकार ने 15 अगस्त 1995 से पूरे देश में मध्यान्ह भोजन योजना शुरू की थी। इसके तहत शुरुआती एक दशक तक स्कूलों में ही भोजन पकवाकर बच्चों को परोसा जाता था। कुछ साल बाद भोजन में एकरूपता लाने के लिए शासन ने साल 2007 से केंद्रीयकृत किचन प्रणाली को अपनाया। तय किया कि शहर के स्कूली बच्चों के लिए भोजन एक ही किचन में बनेगा और इसी किचन से सप्लाई होगा।


यह भी जाने

- उज्जैन शहर में 35 मदरसे हैं। मदरसों में 2 हजार विद्यार्थी हैं।

- वर्तमान में पिछले आठ माह से मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था उज्जैन शहर में शानू स्वसहायता समूह संभाल रहा है।

- चूंकि मदरसों में मध्यान्ह भोजन नहीं पहुंच रहा है, इसलिए उनके विद्यार्थियों के लिए पैसा भी जारी नहीं हो रहा है।

भगवान को लगाते थे भोग...इसलिए किया इंकार

योजना की शुरुआत में जिला पंचायत ने निविदा के जरिए उज्जैन शहर के 110 स्कूलों में भोजन बनाकर पहुंचाने का ठेका धार्मिक ट्रस्ट इस्कॉन को सौंपा था। कुछ दिन योजना का क्रियान्वयन ठीक चला, लेकिन इसी बीच यह बात सुर्खियां बनीं कि भोजन में गंगाजल का इस्तेमाल हो रहा है और भगवान को भोग लगाकर ही स्कूलों में भोजन भेजा जा रहा है। इस पर अगस्त 2015 में उज्जैन के मदरसों ने मध्यान्ह भोजन लेने से इंकार कर दिया। उन्होंने अपने लिए अलग व्यवस्था की मांग की। इस बीत 2016 में जब मध्यान्ह भोजन का ठेका इस्कॉन से लेकर मां पृथ्वी सांवरी और बीआरके फूड को दे दिया गया, मगर फिर भी मदरसा समिति ने भोजन नहीं लिया। तब से ही शहर के मदरसों में मध्यान्ह भोजन नहीं लिया जाता है।

आवेदन दिया

मदरसा समिति ने बीते दिनों जिला पंचायत में आवेदन देकर मध्यान्ह भोजन की मांग रखी है। उनका कहना है कि मदरसों के लिए भोजन के लिए अलग व्यवस्था की जाना चाहिए। अधिकारियों ने इस पर अभिमत के लिए शासन को पत्र भेजा है।

मदरसों में मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था पृथक से करने की मांग जिला मदरसा समिति ने की है। मौजूदा प्रावधान में यह संभव नहीं है। उनकी मांग पर क्या निर्णय लिया जाए, इस पर शासन से अभिमत मांगा गया है। -नीलेश पारिख, सीईओ, जिला पंचायत, उज्जैन

मदरसों में भी मध्यान्ह भोजन मिले, इसके लिए अलग भोजन निर्माण की मांग का पत्र जिला पंचायत को भेजा था। इस पर अब निर्णय नहीं हुआ है। -अश्फाकउद्दीन, अध्यक्ष, जिला मदरसा समिति

अभी एक ही किचन में बना भोजन का प्रावधान है, इसलिए मदरसों के मामले में मध्यान्ह भोजन प्रकोष्ठ से अभिमत मांगा है। -कीर्ति मिश्रा, मध्यान्ह भोजन प्रभारी, जिला पंचायत