
Ujjain News: नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। ग्रामीण विद्यार्थियों की स्कूली पढ़ाई में घर से स्कूल की दूरी बाधा न बने, इसके लिए सरकार ने उन्हें साइकिल देने को योजना शुरू की। मगर ये अकसर लापरवाही और बदइंतजामी का शिकार हुई। ऐसा मौजूदा शिक्षा सत्र में भी हुआ। सत्र 2023- 24 समाप्त होने के कगार पर आ गया है और हालत यह है कि उज्जैन जिले के 1725 स्कूली बच्चों को अब तक सरकार से साइकिल नहीं मिली है। परिणाम स्वरूप उन्हें घर से स्कूल का सफर दोस्त की साइकिल से या मैजिक या बस में धक्के खाकर तय करना पड़ रहा है।
मालूम हो कि कक्षा छठी और नौवीं में दाखिला पाए विद्यार्थियों (जिनके घर से स्कूल की दूरी दो किलोमीटर या इससे अधिक है) के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने निश्शुल्क साइकिल प्रदाय योजना वर्ष 2004-05 में शुरू की थी। वर्ष 2016-17 से पूर्व पात्र बच्चों को साइकिल खरीदने के लिए 2400 रुपये दिए जाते थे। सरकार से संज्ञान में जब ये बात आई कि बच्चों के अभिभावक इन रुपयों से साइकिल नहीं खरीद रहे तो सरकार ने वर्ष 2016-17 से योजना में तब्दीली कर लघु उद्योग निगम के जरिए खुद साइकिल खरीदकर देना प्रारंभ किया। ऐसा करने पर विद्यार्थियों को साल-सालभर देरी से साइकिल मिलने लगी।

फाइल फोटो
उद्देश्य पूरा न होने पर गत वर्ष सरकार ने फिर योजना बदली और साइकिल के लिए राशि बढ़ाकर पुनः खाते में जमा कराना तय किया। जिले में दिसंबर से पहले छठी के पात्र 1988 विद्यार्थियों में से 1784 के बैंक खाते में राशि जमा की। शेष 204 को पिछले साल की स्टाक में रखी साइकिल देने का आदेश जारी हुआ, बावजूद अब तक नहीं दी गई। इसी प्रकार नौवीं के पात्र 5983 विद्यार्थियों में से 4462 विद्यार्थियों के बैंक खाते में राशि जमा की गई। शेष 1521 को अब भी राशि मिलने का इंतजार है।
पिछले शिक्षा सत्र 2022-23 में सरकार ने साइकिल के पात्र सारे विद्यार्थियों को पैदल चलाया था। समय से पूरे एक साल बाद 7094 विद्यार्थियों को साइकिल उपलब्ध कराई थी। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि बीच के दो वर्ष सरकार ने विद्यार्थियों को साइकिल नहीं दी।