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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 15, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ujjain News: शिप्रा नदी में भरा कान्ह का गंदा पानी आगे बहा रहे, जल्द ही नर्मदा का शुद्ध जल भरा जाएगा

दो साल पहले शिप्रा को सदानीरा रखने के लिए सरकार ने 432 करोड़ रुपये खर्च कर नर्मदा से शिप्रा का संगम कराया था।

By Hemant Kumar UpadhyayEdited By: Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Fri, 15 Mar 2024 08:45:49 AM (IST)Updated Date: Fri, 15 Mar 2024 08:45:49 AM (IST)
Ujjain News:  शिप्रा नदी में भरा कान्ह  का गंदा पानी आगे बहा रहे, जल्द ही नर्मदा का शुद्ध जल भरा जाएगा
कान्ह का गंदा पानी बहाए जाने से रामघाट पर शिप्रा का जलस्तर बढ़ गया है।

HighLights

  1. शिप्रा नदी में प्रदूषित पानी के कारण घाट क्षेत्र में फैली दुर्गंध
  2. प्रदूषित पानी त्रिवेणी, गउघाट, रामघाट स्थित स्टाप डैम के गेट खोल आगे बहाया जाने लगा है।
  3. साल 2016 में सरकार ने 95 करोड़ रुपये की कान्ह डायवर्शन परियोजना का क्रियान्वयन कराया था।

नईदुनिया प्रतिनिध‍ि, उज्जैन । मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में भरा सीवेज युक्त कान्ह का प्रदूषित पानी गुरुवार को त्रिवेणी, गउघाट, रामघाट स्थित स्टाप डैम के गेट खोल आगे बहाया जाने लगा है। इससे समूचे घाट क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई है। गुड़ी पड़वा (9 अप्रैल) पर रामघाट एवम दत्त अखाड़ा घाट पर 25 लाख दीप एक साथ प्रज्‍ज्‍वलि‍त करने का विश्व रिकार्ड बनाया जाना है। इसी दिन यहां प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल की सांगीतिक प्रस्तुति है, इसलिए जल्द ही शिप्रा में नर्मदा का शुद्ध, स्वच्छ जल भरे जाने की भी तैयारी है। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह एक दिन पहले कान्ह बैराज का निरीक्षण कर जल प्रबंधन के निर्देश दे चुके हैं।

मालूम हो कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का सीवेज युक्त पांच क्यूमेक प्रदूषित पानी कान्ह नदी के रूप में उज्जैन आकर शिप्रा नदी (स्नान क्षेत्र) में त्रिवेणी घाट के समीप मिलता है। इससे शिप्रा का समूचा स्वच्छ जल भी दूषित हो जाता है। ये मिलन रोकने के लिए साल 2016 में सरकार ने 95 करोड़ रुपये की कान्ह डायवर्शन परियोजना का क्रियान्वयन कराया था। मगर ये परियोजना पूरी तरह सफल नहीं हो पाई।


इसके दो साल पहले शिप्रा को सदानीरा रखने के लिए सरकार ने 432 करोड़ रुपये खर्च कर नर्मदा से शिप्रा का संगम कराया था। प्राकृतिक प्रवाह से पानी छोड़ने की ये योजना थी, जिसके परिणाम उम्मीद अनुरूप नहीं मिले तो सरकार ने 2019 में 139 करोड़ रुपये से नर्मदा का जल पाइपलाइन बिछाकर शिप्रा में पहुंचाने की व्यवस्था जमाई। इतना करने पर भी शिप्रा ना ही सदानीरा हो पाई ना पानी शुद्ध हुआ।

इस पर सरकार ने सिंहस्थ -2052 के वक्त इंदौर एवं सांवरे शहर की आबादी और सीवेज उद्वहन को ध्यान में रख 5 दिसंबर- 2022 को 598 करोड़ 66 लाख रुपये की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना को मंजूरी प्रदान की। निविदा 19 अप्रैल 2023 को खोली गई, मगर काम करने को श्रेष्ठ प्रस्ताव देने वाली एक भी फर्म का चयन अब तक सरकार ने नहीं किया।

शिप्रा शुद्धि के लिए अभी ये है योजना

कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना

क्षिप्रा के नहान क्षेत्र में कान्ह का पानी मिलने से रोकने को 14 महीने पहले 5 दिसंबर 2022 को जल संसाधन विभाग ने कान्ह का 40 क्यूमेक पानी का रास्ता बदलने के लिए 598 करोड़ 66 लाख रुपये की कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना स्वीकृत की थी, जिसका टेंडर खुले कई महीने बीत चुके हैं। परियोजना के क्रियान्यन की जिम्मेदारी पाने को हैदराबाद की वेंसर कंस्ट्रक्शन ने सारी अर्हता प्राप्त कर ली है, बावजूद उसे कार्य आदेश जारी नहीं किया जा रहा। रिपोर्ट के अनुसार इस कंपनी ने 15 प्रतिशत बिलो रेट पर काम करने का प्रस्ताव दिया है। अगर कार्य आदेश जारी हुआ तो लगभग चार साल योजना पूरी होने में लगेंगे। निविदा शर्त अनुरूप तय ठेकेदार फर्म को अगले 15 वर्ष योजना का रखरखाव भी करना होगा। योजना में त्रिवेणी घाट के समीप गोठड़ा गांव में कान्ह पर पांच मीटर ऊंचा स्टापडेम बनाने, यहां से कालियादेह महल के आगे तक 16.5 किलोमीटर लंबा एवं 4.5 बाय 4.5 मीटर चौड़ा पाइपलाइन नुमा आरसीसी बाक्स बनाकर जमीन पर बिछाने का प्राविधान है। दावा है कि इस चोकोर बाक्सनुमा पाइपलाइन से कान्ह का 40 क्यूमेक पानी डायवर्ट किया जा सकेगा। अंतिम 100 मीटर लंबाई में ओपन चैनल का निर्माण किया जाएगा।

कान्ह पर एसटीपी योजना

स्वच्छ गंगा मिशन अंतर्गत इंदौर में 34, 40, 120 एमएलडी (मिलियन लीटर्स पर-डे) के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने को 11 महीने पहले सरकार ने 511 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। इसके महीनों बाद योजना को क्रियान्वित कराने को 427 करोड़ रुपये का टेंडर आमंत्रित किया। टेंडर खुले कई सप्ताह गुजर गए हैं पर टेंडर स्वीकृत नहीं हुआ है। कहा जा रहा है कि योजना केंद्र की है, इसलिए कुछ वक्त लगेगा।

शिप्रा पर एसटीपी

स्वच्छ गंगा मिशन अंतर्गत नौ महीने पहले केंद्र सरकार ने उज्जैन नगर निगम को 95 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। विधानसभा चुनाव से पहले पीलियाखाल में 22 एमएलडी एवम भैरवगढ़ में 2.4 एमएलडी कंट्रीटमेंट प्लांट लगाने संबंधी निविदा प्रक्रिया की। ये अब तक स्वीकृत न हुई है। हैरानी की बात ये है टेंडर खुलने के बाद नगर निगम परिषद ने अभी कुछ दिन पहले निविदा प्रस्ताव आमंत्रित करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया था।

भूमिगत सीवेज पाइपलाइन परियोजना

436 करोड़ रुपये की ये परियोजना नगर निगम की है, जो कायदे से दो वर्ष की अनुबंध अवधि अनुसार नवंबर- 2019 में ही पूरी हो जाना थी मगर अब तक अधूरी है। परियोजना को धरातल पर उतारने का काम ठेकेदार फर्म टाटा प्रोजेक्ट्स कंपनी कर रही है। कंपनी का दावा है कि वो जून- 2024 तक प्रोजेक्ट पूरा कर लेगी मगर काम की गति देखकर प्रतीत होता है कि परियोजना इस साल भी पूरी न हो पाएगी।