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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 28, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Ujjain News: शिप्रा नदी के प्रदूषित पानी में हुआ कार्तिक पूर्णिमा का पर्व स्नान

मतदाताओं को नई सरकार से शिप्रा शुद्धीकरण की उम्मीद है। मालूम हो कि इस चुनाव में भी शिप्रा नदी मुद्दा बनाई गई थी। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र (संकल...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Tue, 28 Nov 2023 01:40:39 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Nov 2023 01:40:39 PM (IST)
Ujjain News: शिप्रा नदी के प्रदूषित पानी में हुआ कार्तिक पूर्णिमा का पर्व स्नान
रामघाट पर शिप्रा के प्रदूषित पानी में स्नान करते श्रद्धालु।

HighLights

  1. वजह : इंदौर के सीवेज युक्त कान्ह का गंदा पानी मिलने से रोकने का प्रबंध न होना
  2. रामघाट के समीप शहर के उफनते नाले का पानी शिप्रा में मिलता रहा।
  3. कान्ह का पानी शिप्रा में कई वर्षों से मिल रहा है। इसे रोकने को घाट से लेकर सड़क, दफ्तर और विधानसभा तक में प्रश्न- प्रदर्शन हो चुके हैं।

Ujjain News: नईदुनिया प्रत‍िन‍िध‍ि, उज्जैन। कार्तिक पूर्णिमा का पर्व स्नान सोमवार को रामघाट पर शिप्रा नदी के प्रदूषित जल में हुआ। त्रिवेणी पर नदी में कान्ह का गंदा पानी मिलता रहा और रामघाट के समीप उज्जैन शहर के उफनते नालों का। हजारों लोगों ने नाक-मुंह सिकोड़कर ही सही नदी में डुबकी लगाई और पुण्य की कामना की।

#WATCH मध्य प्रदेश: कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने उज्जैन में दीप दान किया। (27.11) pic.twitter.com/mLM5TuJY9j

— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 28, 2023

नहीं किया गया यह कार्य

मालूम हो कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के सीवेज युक्त नालों का गंदा पानी कान्ह नदी के रूप में उज्जैन आकर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में मिल शिप्रा के स्वच्छ जल को भी दूषित कर रहा है। कायदे से शासन-प्रशासन को ये मिलन रोकने के लिए स्थायी बंदोबस्त कर लेना था मगर ऐसा नहीं किया।


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वर्षों से श‍िप्रा में मिल रहा कान्‍ह नदी का पानी

कान्ह का पानी शिप्रा में कई वर्षों से मिल रहा है। इसे रोकने को घाट से लेकर सड़क, दफ्तर और विधानसभा तक में प्रश्न- प्रदर्शन हो चुके हैं। सात वर्ष पहले कान्ह का रास्ता बदलने को 95 करोड़ रुपये की एक योजना धरातल पर आकार भी ले चुकी है। ये बात अलग है कि ये पूरी तरह सफल न हो सकी। इसके जवाब में पिछले वर्ष बजट पांच गुना बढ़ाकर 598 करोड़ रुपये की फिर ऐसी ही एक योजना बनाई पर उसे धरातल पर न उतारा गया।

भावी सरकार से शिप्रा शुद्धीकरण की उम्मीद

मतदाताओं को नई सरकार से शिप्रा शुद्धीकरण की उम्मीद है। मालूम हो कि इस चुनाव में भी शिप्रा नदी मुद्दा बनाई गई थी। भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र (संकल्प पत्र) में एक बार फिर शिप्रा को शामिल कर इसके उद्धार का संकल्प लिया है। कहा गया था कि शिप्रा को निर्मल (स्वच्छ) एवं अवरिल (प्रवाहमान) बनाने को शिप्रा रिवर बेसिन अथारिटी बनाएंगे। शिप्रा महोत्सव करेंगे। घाटों का नवीनीकरण एवं सुंदरीकरण करेंगे। कुछ ऐसी ही बात कांग्रेस भी कही थी। पिछले दो चुनावों और बीच के सालों में भी कही थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शिप्रा के पानी को डी-ग्रेड का करार दे चुका है। इसका मतलब है पानी आचमन, स्नान लायक नहीं है।

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डेढ़ महीने बाद मकर संक्रांति का स्नान, सवाल- ये स्वच्छ जल में होगा या नहीं

अब डेढ़ महीने बाद उज्जैन में मकर संक्रांति का पर्व स्नान होना है। सवाल ये है कि ये स्नान शिप्रा नदी के स्वच्छ जल में होगा या नहीं। ध्यान देने वाली बात ये है कि पिछले वर्षों तक प्रशासन शिप्रा में भरा गंदा पानी आगे बहाकर उसमें नर्मदा का स्वच्छ जल भर मकर संक्रांति का स्नान कराती आई है। इसके लिए कान्ह का पानी शिप्रा में मिलने से रोकने के लिए त्रिवेणी घाट के समीप 20-25 लाख रुपये खर्च कर मिट्टी का कच्चा पुल भी बनाया जाता रहा है। ये अलग बात है कि ये पुल बहाव तेज होने पर कभी नहान शुरू होने से चंद घंटे पहले बह गया या नहान समाप्त होने के बाद। जिस वेग से कान्ह का पानी शिप्रा में मिल रहा है उससे कच्चा पुल बनाना मुश्किल प्रतीत होता है।