
Ujjain News: नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन । मकर संक्रांति (15 जनवरी) का पर्व स्नान ‘नर्मदा-शिप्रा’ के स्वच्छ संगम जल में कराने को स्थानीय प्रशासन ताकत झोंकता नजर आ रहा है। शिप्रा में प्रदूषित कान्ह का पानी मिलने से रोकने और गऊघाट क्षेत्र में पहले से जमा गंदा पानी आगे बहाने के रूप में काम धरातल पर दिखाई दे रहा है। दावा है नहान से एक-दो दिन पहले शिप्रा को पूरी तरह खाली कर नर्मदा का स्वच्छ जल भरा जाएगा।
पाइपलाइन के जरिए आएगा नर्मदा का पानी
नर्मदा का जल पाइपलाइन के माध्यम से उज्जैन आएगा और त्रिवेणी मोक्षधाम घाट पर बने आउटलेट से शिप्रा का आंचल भरेगा। इस बार त्रिवेणी घाट के समीप मिट्टी का कच्चा बांध बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। निनोरा और पिपल्याराघो के बीच कान्ह नदी पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा बनाए पुल पर कान्ह का पानी कुछ दिन रोक लिया जाएगा।
कान्ह का पानी मिलता है
मालूम हो कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का सीवेज युक्त पांच क्यूमेक प्रदूषित पानी कान्ह नदी के रूप में उज्जैन आकर शिप्रा नदी (स्नान क्षेत्र) में त्रिवेणी घाट के समीप मिलता है। इससे शिप्रा का समूचा स्वच्छ जल भी दूषित होता है। ये मिलन रोकने को साल 2016 में मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने 95 करोड़ रुपये खर्च कर कान्ह डायवर्शन पाइपलाइन परियोजना को धरातल पर उतारा था, जो पूरी तरह सफल न हो पाई।
हर साल ऐसी कवायद
परिणाम ये निकला कि मकर संक्रांति का स्नान कराने के लिए हर साल सरकार कान्ह का मिलन रोकने को त्रिवेणी घाट के समीप कान्ह पर मिट्टी का कच्चा बांध बनाती रही, शिप्रा में भरा गंदा पानी आगे बहाकर खाली नदी में पाइपलाइन के जरिये नर्मदा का भरकर नहान कराती रही। ऐसा इस बार भी होगा।
इस बार यह नहीं होगा
बस फर्क ये है इस बार त्रिवेणी घाट के समीप मिट्टी का कच्चा बांध नहीं बनाया जाएगा। क्योंकि ऐसा एक कच्चा बांध भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अपनी उज्जैन-बड़नगर-बदनावर फोरलेन सड़क परियोजना को पूरी करने के लिए कान्ह नदी पर पुल बनाने के लिए बनवा चुका है और यहीं कुछ दिन के लिए पानी रोकने का प्रयास किया जाएगा।
कितना पानी रुकेगा, ये तो वक्त ही बताएगा, पर इतना स्पष्ट है कि प्रशासन अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ेगा। क्योंकि प्रश्न लोगों की आस्था का है। ये दिन इसलिए भी खास है क्योंकि मकर संक्रांति पर ही उज्जैन में प्रदेश के विस्तारित मंत्री मंडल की पहली बैठक संभावित है। इसके मद्देनजर विषय प्रतिष्ठा का भी बन गया है।