
Ujjain News उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। धार्मिक व पौराणिक महत्व के सप्त सागर सिंहस्थ 2016 के बाद से उपेक्षित पड़े हैं। शहर के प्राचीन जल संरचना में शुमार इन सागरों में से कुछ के उन्ना्यन व सुंदरीकरण के लिए कार्य की शुरुआत भी हुई थी, लेकिन फंड की कमी के चलते काम आगे नहीं बढ़ पाए। कुछ सागर अब भी जीर्णोद्धार की बाट जोह रहे हैं। इनकी ओर शासन प्रशासन का ध्यान नहीं है।
धर्मधानी उज्जयिनी में रूद्रसागर, रत्नाकर सागर, गोवर्धन सागर, पुरुषोत्तम सागर, पुष्कर सागर, विष्णु सागर तथा क्षीर सागर स्थित हैं। स्कंदपुराण के अवंतिखंड में इनका उल्लेख मिलता है। तीन साल में एक बार आने वाले अधिकमास में सप्त सागरों की यात्रा व पूजा अर्चना का विधान है। देश विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु अधिकमास में इन सागरों की परिक्रमा कर शास्त्रोक्त दान-पुण्य करते हैं। समय-समय पर सप्त सागरों के संरक्षण व विकास के लिए योजनाएं बनती रही हैं। लेकिन किसी ना किसी कारण से मामला अधर में रह जाता है। इससे इन सागरों का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। इन परिस्थितियों के कारण कुछ एक सागर का अस्तित्व समाप्ति की कगार पर है।
सागर की जगह नजर आ रहा कूढ़े का ढेर
बुधवारिया में चेरिटेबल अस्पताल के सामने प्राचीन गोवर्धन सागर स्थित है। कुछ सालों पहले तक सागर सदानीरा नजर आता था, लेकिन उपेक्षा के कारण धीरे-धीरे इसका अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। आज यहां कूढ़े ढेर व घास नजर आती है। सप्त सागरों में सबसे अधिक बदहाली का शिकार यही सागर है। अब तक इस सागर के विकास के लोकर कोई योजना नहीं बनी है। आसपास रिहायशी क्षेत्र होने के कारण लोग इसमें भराव कर अतिक्रमण कर रहे हैं। इस सागर के संवर्धन व विकास की सबसे अधिक आवश्यकता है।
पुरुषोत्तम सागर का काम रुका
नगर निगम द्वारा इंदिरा नगर ईदगाह के समीप स्थित पुरुषोत्तम सागर के विकास व सुंदरीकरण की योजना बनाई गई है। 3 करोड़ 82 लाख रुपये की योजना में सागर के किनारों पर घाट आदि का निर्माण किया जा रहा है। प्रथम चरण का काम पूरा हो गया है, लेकिन फंड की कमी के चलते शेष काम बंद पड़े हैं।
मृदा प्रोजेक्ट में संवर रहा रूद्रसागर
महाकाल मंदिर के पीछे रूद्र सागर स्थित है। सालों से उपेक्षित रूद्र सागर के दिन अब फिरने लगे हैं। मृदा प्रोजेक्ट के अंतर्गत महाकालेश्वर विस्तारीकरण कार्य के चलते रूद्र सागर को संवारा जा रहा है। चारधाम मंदिर मार्ग से महाकाल मंदिर के निर्गम द्वार तक सागर पर पुल का निर्माण भी किया जाएगा।
गया कोठा तीर्थ विकास का काम भी रुका
मध्यप्रदेश शासन धर्मस्व विभाग द्वारा 10 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से गया कोठा तीर्थ का विकास कराया जा रहा है। निर्माण एजेंसी हाउसिंग बोर्ड को बनाया गया है। पहले चरण में 3 करोड़ 94 लाख रुपये की लागत से यहां पितृकर्म के लिए हॉल, बाउंड्रीवाल, प्रवेश द्वार का निर्माण हो गया है, लेकिन बाद में राशि का आवंटन रुक गया। इसके चलते काम बंद पड़ा है। तीर्थ परिक्षेत्र में धार्मिक महत्व की ऋ षि तलाई के घाट आदि का काम पूरा नहीं होने से तलाई में भरा पानी बदूब मार रहा है। अधूरे पड़े निर्माण कार्य से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को काफी परेशानी हो रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जब तक शासन से राशि प्राप्त नहीं होती, काम शुरू नहीं हो पाएगा।
उज्जैन को आवंटित करेंगे बची हुई राशि
धर्मस्व विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में तीर्थ विकास व सुंदरीकरण के लिए कार्य कराए जा रहे हैं। इन्हीं में उज्जै का गया कोठा तीर्थ भी शामिल है। बताया जाता है विभाग प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों में से बची हुई राशि को गया कोठा तीर्थ विकास के लिए आवंटित करेगा। उस राशि से दूसरे फेज का काम शुरू होगा।
राशि आवंटन के लिए लिखा है पत्र
गयाकोठा में बंद पड़े काम को शुरू करने के लिए धर्मस्व विभाग को पत्र लिखा है। राशि आवंटित होने के बाद फिर से निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
-आरसी पंवार, कार्यपालन यंत्री, हाउसिंग बोर्ड