
डिजिटल डेस्क, उज्जैन। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में मंदिरों को सवारने के लिए सरकार टेंपल बांड स्कीम शुरू करने जा रही है। देश में इसकी शुरुआत उज्जैन से हो रही है, जिसमें महाकाल सहित 11 मंदिरों के लिए 200 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। इस स्कीम पर तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सवाल उठाए हैं।
विधायक महेश परमार ने विधानसभा में सरकार से इसको लेकर प्रश्न पूछा है। उनका कहना है कि अभी तक इसका जवाब उन्हें नहीं मिला है। विधायक का कहना है कि बांड के जरिए जो रुपये सरकार मंदिरों के रखरखाव के लिए जुटाएगी, उन्हें वापस चुकाया कैसे जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की स्कीम से मंदिरों में चढ़ावे और उसकी संपत्तियों को गिरवी रखने की योजना बनाई जा रही है। विधायक ने इसे मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम और श्री महाकालेश्वर मंदिर अधिनियम का उल्लंघन भी बताया है।
महाकाल मंदिर के साथ श्री कालभैरव मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनी आश्रम, गढ़कालिका मंदिर, सिद्धवट, नवग्रह शनि मंदिर, अंगारेश्वर महादेव, भूखी माता मंदिर, 84 महादेव मंदिर श्रृंखला तथा आगर-मालवा का प्रसिद्ध बगलामुखी माता मंदिर प्रमुख हैं।
अब तक देश में मंदिरों के विकास के लिए सरकारी बजट, दान और ट्रस्ट की आय पर ही निर्भरता रही है। उज्जैन का टेंपल बॉन्ड मॉडल पहली बार पूंजी बाजार आधारित वित्त जुटाने की पहल है। सफल होने पर धार्मिक शहरों के विकास के लिए यह देशभर में नया वित्तीय मॉडल बन सकता है और सरकारों की बजटीय निर्भरता भी घटा सकता है।