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उज्जैन में रामघाट पर भगवान धर्मराज मंदिर में एक साथ विराजित हैं 12 ज्योतिर्लिंग, 84 महादेव, विष्णु के 24 अवतार

धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिकमास में उज्जैन के चौरासी महादेव व नौ नारायण के दर्शन का विधान है।

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Mon, 06 Apr 2026 02:01:00 PM (IST)Updated Date: Mon, 06 Apr 2026 02:04:56 PM (IST)
उज्जैन में रामघाट पर भगवान धर्मराज मंदिर में एक साथ विराजित हैं 12 ज्योतिर्लिंग, 84 महादेव, विष्णु के 24 अवतार
पाषाण शिला पर बारह ज्योतिर्लिंग व चौरासी महादेव के शिवलिंग और एक ही पत्थर पर उत्कीर्ण भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों की मूर्ति।

HighLights

  1. एक ही शिला पर 12 ज्योतिर्लिंग और 84 महादेव
  2. दूसरी शिला पर विष्णु के चौबीस अवतारों का अंकन
  3. अधिकमास में इनके दर्शन का है विशेष महत्व

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पर भगवान धर्मराज का अनूठा मंदिर है। इस मंदिर में पाषाण शिला पर उत्कीर्ण बारह ज्योतिर्लिंग, चौरासी महादेव तथा भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों का अंकन है। यहां दर्शन करने आने वाले भक्त एक साथ 12 ज्योतिर्लिंग, 84 महादेव तथा भगवान विष्णुओं के 24 अवतारों का दर्शन करते हैं।

पुराविद डॉ.रमण सोलंकी ने बताया धर्मधानी उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकाल, शक्तिपीठ हरसिद्धि, कालभैरव, मंगलनाथ जैसे पुराण प्रसिद्ध मंदिरों के कारण तो विश्व में अपना विशेष स्थान रखी ही है। यहां कुछ मंदिर ऐसे हैं जो वास्तु और मूर्ति शिल्प की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिप्रा के रामघाट स्थित श्री धर्मराज चित्रगुप्त मंदिर इन्हीं में से एक है।


इस मंदिर में एक ही पाषण शिला पर बारह ज्योतिर्लिंग, चौरासी महादेव, नागयंत्र स्थापित है। एक दूसरी शिला पर विष्णु के चौबीस अवतारों का अंकन है। दोनों ही शिलाओं के मूर्ति शिल्प परमार काल के एक हजार साल पुराने हैं। मंदिर में भगवान धर्मराज व चित्रगुप्त की मूर्तियां भी विराजित है।

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अधिकमास में दर्शन का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रावण में शिव, कार्तिक मास में विष्णु, वैशाख मास में शिव और विष्णु तथा हर तीन साल में आने वाले अधिकमास में उज्जैन के चौरासी महादेव व नौ नारायण के दर्शन का विधान है। इस बार 2 मई से 29 जून तक ज्येष्ठ अधिकमास का संयोग बन रहा है। ऐसे में भक्त इस मंदिर में आकर एक ही बार में एक साथ चौरासी महादेव नौ नारायण का दर्शन पूजन कर सकेंगे।

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