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उज्जैन में 81 करोड़ रुपये से शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करेगी यूपी की कंपनी, नमामि गंगे मिशन को हरी झंडी

केंद्र सरकार ने 81 करोड़ रुपये के टेंडर को स्वीकृति देते हुए गाजियाबाद उत्तरप्रदेश की ‘सोमवंशी एनवायरो फर्म’ का चयन किया है। अब महापौर परिषद की मंजूरी...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Thu, 04 Jun 2026 10:18:50 AM (IST)Updated Date: Thu, 04 Jun 2026 10:18:50 AM (IST)
उज्जैन में 81 करोड़ रुपये से शिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त करेगी यूपी की कंपनी, नमामि गंगे मिशन को हरी झंडी
शिप्रा नदी, जिसके जल की शुद्धता के लिए एसटीपी लगाया जाएगा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. तीन साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद शिप्रा नदी को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने वाली परियोजना को मिली मंजूरी
  2. केंद्र सरकार ने 81 करोड़ रुपये के टेंडर को स्वीकृति देते हुए उत्तरप्रदेश की फर्म’ का चयन किया है
  3. महापौर परिषद की मंजूरी के बाद कार्य आदेश जारी होते ही जमीन पर काम शुरू हो जाएगा

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। तीन साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद आखिरकार शिप्रा नदी को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने वाली ‘नमामि गंगे मिशन परियोजना’ को मंजूरी मिल गई है। केंद्र सरकार ने 81 करोड़ रुपये के टेंडर को स्वीकृति देते हुए गाजियाबाद उत्तरप्रदेश की ‘सोमवंशी एनवायरो फर्म’ का चयन किया है। अब महापौर परिषद की मंजूरी के बाद कार्य आदेश जारी होते ही जमीन पर काम शुरू हो जाएगा।

यह परियोजना शिप्रा नदी में गिरने वाले भैरवगढ़ और पीलियाखाल क्षेत्र के दूषित नालों को उपचारित करने के लिए तैयार की गई है। जल शक्ति मंत्रालय ने 24 मई 2023 को इसके लिए 92 करोड़ 78 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की थी।


उस समय दावा किया गया था कि दो महीने में निविदा प्रक्रिया पूरी कर 18 माह में निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा, लेकिन लगातार तकनीकी और वित्तीय प्रक्रियाओं में उलझने के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। जून 2023 में महापौर परिषद ने टेंडर प्रक्रिया को मंजूरी दी थी। इसके बाद चार फर्मों ने निविदा में भाग लिया था, लेकिन लंबी परीक्षण प्रक्रिया के बाद सभी प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए। इसके बाद इसी साल फरवरी माह में संशोधित दरों के साथ पुनः निविदा आमंत्रित की गई थी। अब केंद्र सरकार द्वारा सोमवंशी एनवायरो फर्म के प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से परियोजना का रास्ता साफ हो गया है।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच ये परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच इस परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी शिप्रा नदी में वर्तमान में भैरवगढ़ क्षेत्र की बटिक प्रिंट इकाइयों और पीलियाखाल नाले का दूषित पानी पहुंचता है। परियोजना पूरी होने के बाद यह पानी उपचारित होकर ही नदी में छोड़ा जाएगा, जिससे जल गुणवत्ता में सुधार आएगा।

दो एसटीपी और आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम बनेंगे

परियोजना के तहत भैरवगढ़ क्षेत्र में 2.38 एमएलडी तथा पीलियाखाल क्षेत्र में 22.06 एमएलडी क्षमता के दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाए जाएंगे। इसके अलावा दो सीवेज पंपिंग स्टेशन, दो एफ्लुएंट पंपिंग स्टेशन, लगभग 1420 मीटर राइजिंग मेन तथा 3500 मीटर एफ्लुएंट लाइन बिछाई जाएगी। जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए पीएलसी-स्काडा आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित सुविधाएं भी शामिल हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद चयनित एजेंसी अगले 15 वर्षों तक संयंत्रों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेगी।

सिंहस्थ से पहले पूरी करने की चुनौती

परियोजना शुरू होने के बाद इसे 18 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि तीन साल की देरी के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिंहस्थ-2028 से पहले कार्य पूर्ण कराने की होगी। यदि तय समयसीमा में काम पूरा होता है तो शिप्रा नदी के प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में यह अब तक की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजना साबित होगी।

क्या बदलेगा

  • भैरवगढ़ और पीलियाखाल के गंदे नाले सीधे शिप्रा में नहीं मिलेंगे।
  • दो आधुनिक एसटीपी में सीवेज का उपचार होगा।
  • शिप्रा के जल की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
  • सिंहस्थ-2028 के लिए स्वच्छ नदी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
  • 15 वर्ष तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी एजेंसी पर रहेगी।

टेंडर स्वीकृत हो चुका है

नमामि गंगे मिशन शिप्रा नदी संरक्षण की महत्वपूर्ण परियोजना है। टेंडर स्वीकृत हो चुका है। निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण कर शीघ्र कार्य शुरू कराया जाएगा ताकि सिंहस्थ-2028 से पहले परिणाम मिल सके। -रोशन कुमार सिंह, कलेक्टर

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