Valmiki Jayanti 2021: राजेश वर्मा, उज्जैन। महर्षि वाल्मीकि ने भगवान महाकाल के आशीर्वाद से उज्जैन में कुश के आसन पर बैठकर रामायण महाकाव्य की रचना की थी। इसका उल्लेख स्कंद पुराण के अवंतिखंड में 27वें अध्याय के एक उपाख्यान में मिलता है। महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान के निदेशक डा. पीयूष त्रिपाठी ने अपने शोध में यह दावा किया है। शोध पत्र में उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़ी घटनाओं व किंवदंतियों का उल्लेख भी किया है। बकौल डा. त्रिपाठी, यह बात कम लोग ही जानते हैं कि महर्षि वाल्मीकि कभी उज्जैन आए थे अथवा धर्मधानी से उनका नाता भी रहा है। स्कंद पुराण के अवंतिखंड में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि महर्षि तपस्या व स्वाध्याय प्रयागराज में किया करते थे, लेकिन रामायण महाकाव्य की रचना करने के लिए वे कुशस्थली (उज्जैन का प्राचीन नाम) आए थे।
महर्षि वाल्मीकि ने उज्जैन आकर भगवान महाकाल की आराधना की और कवित्व प्राप्त किया। उसके उपरांत रामायण महाकाव्य की रचना की। उनका यह स्थान आज भी उज्जैन में शिप्रा के तट पर श्री सिद्धक्षेत्र वाल्मीकि धाम के नाम से स्थापित है।
योग साधना से लिखा महाकाव्य : डा. त्रिपाठी ने अपने शोध पत्र में लिखा है कि कुश के आसन पर बैठ कर महर्षि वाल्मीकि ने विधिवत आचमन कर हाथ जोड़े और फिर योग साधना द्वारा श्रीराम आदि के चरित्र का अनुसंधान करते हुए महाकाव्य की रचना की। महाकाल के आशीर्वाद से यह पहला महाकाव्य कहलाया।
अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि के दिन हुआ था जन्म
सनातन धर्म में मान्य पंचांगों के अनुसार महर्षि वाल्मीकि का जन्म अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि के दिन हुआ था, इसलिए प्रत्येक वर्ष इसी तिथि पर उनकी जयंती मनाई जाती है। इस बार वाल्मीकि जयंती 20 अक्टूबर, बुधवार के दिन है।
शिप्रा तट पर करीब दो हजार वर्गफीट में फैला श्री सिद्धक्षेत्र वाल्मीकि धाम आश्रम देश-विदेश के लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। आश्रम के पीठाधीश्वर राष्ट्रीय संत बालयोगी उमेशनाथजी महाराज की प्रेरणा से ही अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर परिसर में महर्षि वाल्मीकि का मंदिर बनाया जा रहा है। इसके भूमि पूजन में वाल्मीकि धाम आश्रम की मिट्टी अयोध्या लेजाई जाएगी।