
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : इंदौर से उज्जैन आने-जाने वालों के लिए राहत की सड़क अब लगभग तैयार है। 46.475 किलोमीटर लंबे इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन का 97.54 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। त्रिवेणी क्षेत्र में नवनिर्मित ब्रिज पर भी वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है।
अब कुछ ही काम शेष हैं, जिनमें उज्जैन शहर की सीमा में सर्विस रोड पर पीक्यूसी बिछाना प्रमुख है। यह काम नगर निगम की पाइपलाइन और चैंबर संबंधी काम पूरे होने के बाद ही हो सकेगा। करीब 1692 करोड़ रुपये की परियोजना को नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अच्छी बात ये है कि उज्जैन से इंदौर की दूरी अब कम समय में पूरी होने से यात्री और अपडाउनर्स खुश हैं।
मालूम हो कि इंदौर के अरविंदो मेडिकल कॉलेज क्षेत्र से उज्जैन के हरिफाटक चौराहे तक इस मार्ग को चार लेन से छह लेन में बदला गया है। सड़क चौड़ी होने से दोनों शहरों के बीच वाहनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ी है। सामान्य दिनों में उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी इसका लाभ आगे भी मिलना तय है।
सिंहस्थ-2028 के दौरान इंदौर की ओर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में यह मार्ग यातायात व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा। परियोजना से जुड़े एमपीआरडीसी के अधिकारी के अनुसार, काम का 97.54 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है और सभी प्रमुख संरचनाओं का निर्माण भी पूरा कर लिया गया है।
अब कुछ विविध कार्य बाकी हैं। उज्जैन शहर की सीमा में सर्विस रोड पर पीक्यूसी का काम नगर निगम की पाइपलाइन और चैंबर का काम पूरा होने के बाद किया जाएगा। इस हिस्से में काम पूरा होने के बाद परियोजना के शेष कार्यों को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।
सिक्सलेन परियोजना में तीन फ्लाईओवर और छह अंडरपास बनाए गए हैं। प्रमुख स्थानों पर जंक्शन और सर्विस रोड भी विकसित की गई हैं। इनका उद्देश्य मुख्य मार्ग पर यातायात को सुचारु रखना और स्थानीय वाहनों की आवाजाही को आसान बनाना है। चौराहों पर रुकावट कम होने से इंदौर और उज्जैन के बीच सफर अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
सिंहस्थ-2028 के दौरान इंदौर की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर इस सड़क की उपयोगिता और बढ़ी है। चौड़ा मार्ग वाहनों की आवाजाही में मदद कर रहा है। सर्विस रोड और अंडरपास स्थानीय यातायात को मुख्य मार्ग से अलग रखने में सहायक होंगे। इससे शहर में प्रवेश के दौरान यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है। परियोजना का भूमिपूजन 19 सितंबर 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था। अब नवंबर तक काम पूरा कर देव उठनी ग्यारस के आसपास लोकार्पण कराने का लक्ष्य है।
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