• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • मध्य प्रदेश
  • उज्जैन

उज्जैन में 17 सितंबर से युवा धर्म संसद, एआई के युग में मनुष्य निर्माण का महामंथन

Yuva Dharma Sansad: एआई शिक्षा, रोजगार, कारोबार और रोजमर्रा के जीवन को बदल रहा है। सवाल उठेंगे कि तकनीक रोजगार बढ़ाएगी या पारंपरिक कामों का स्वरूप बदल...और पढ़ें

By Dheeraj GomeEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 16 Sep 2026 11:17:52 AM (IST)Updated Date: Wed, 16 Sep 2026 11:22:12 AM (IST)
उज्जैन में 17 सितंबर से युवा धर्म संसद, एआई के युग में मनुष्य निर्माण का महामंथन
उज्जैन में तीन दिन तक चलेगी युवा धर्म संसद। - एआई इमेज

HighLights

  1. एआई, तकनीक, शिक्षा, रोजगार और मानवीय मूल्यों पर करेंगे मंथन
  2. उज्जैन में 24 राज्यों से 1700 से ज्यादा युवा इसमें शामिल होंगे
  3. इसमें तकनीक के मानवीय और नैतिक प्रभावों पर भी चर्चा होगी

धीरज गोमे, नईदुनिया, उज्जैन। एआई के दौर में इंसान अपने विवेक, संवेदना और जिम्मेदारी को कैसे बचाए रखे? उज्जैन में 17 सितंबर से शुरू होने वाली तीन दिवसीय युवा धर्म संसद में इस सवाल पर महामंथन होगा। धर्म और संस्कृति के साथ एआइ, तकनीक, शिक्षा, रोजगार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सामाजिक दायित्व और मानवीय मूल्यों पर चर्चा होगी। 24 राज्यों से 1700 से ज्यादा युवा इसमें शामिल होंगे।

सेवाज्ञ संस्थानम् के छठे संस्करण में छात्र, शोधार्थी, शिक्षक, संत, शिक्षाविद और सामाजिक चिंतक एक मंच पर होंगे, लेकिन संवाद का केंद्र युवाओं के सवाल रहेंगे। धर्म को पूजा-पद्धति और आस्था तक सीमित न रखकर कर्तव्य, आचरण, नैतिकता और लोकमंगल के संदर्भ में समझने का प्रयास होगा। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान-तकनीक के बीच संवाद पर भी विचार किया जाएगा।


तकनीक की रफ्तार के बीच संवेदना का सवाल

एआई शिक्षा, रोजगार, कारोबार और रोजमर्रा के जीवन को बदल रहा है। सवाल उठेंगे कि तकनीक रोजगार बढ़ाएगी या पारंपरिक कामों का स्वरूप बदलेगी। शिक्षा में एआई शिक्षक और विद्यार्थी के संबंध को कैसे प्रभावित करेगी? जब मशीनें जानकारी और विश्लेषण दे सकती हैं, तब इंसानी विवेक की भूमिका क्या होगी? सूचना की बाढ़ में सही-गलत की पहचान कैसे होगी? तकनीक के मानवीय और नैतिक प्रभावों पर भी चर्चा होगी।

स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी

व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का सवाल भी उठेगा। पर्यावरण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सरोकारों पर युवाओं के दृष्टिकोण सामने आएंगे। उद्देश्य किसी एक निष्कर्ष तक पहुंचाना नहीं, बल्कि विचार, तर्क और संवाद का अवसर देना है।

व्याख्यान से आगे सवाल-जवाब

18 सितंबर को ‘धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व’ और 19 सितंबर को ‘ऋषि एवं कृषि संस्कृति के मध्य भारत का आजीविका विचार’ विषय पर मुख्य सत्र होंगे। पहले दिन सूचना एवं विचार के संघर्ष तथा मनुष्य निर्माण में आस्था और धर्मस्थलों की भूमिका पर प्रश्नोत्तरी होगी। युवा वक्ताओं से सीधे सवाल भी कर सकेंगे।

यह भी पढ़ें- सिंहस्थ में 40 करोड़ श्रद्धालुओं की सुरक्षा में सहयोग करेगी भारतीय सेना, हाईटेक तकनीक का किया जाएगा इस्तेमाल, उज्जैन में बनेगा कमांड सेंटर

मंथन के प्रमुख विषय

  • एआई और तकनीक
  • शिक्षा और रोजगार
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता
  • सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी
  • पर्यावरण और सामाजिक सरोकार
  • धर्म, नैतिकता और मानवीय मूल्य

युवाओं के सामने पांच बड़े सवाल

  • एआई के दौर में इंसान की भूमिका क्या होगी?
  • तकनीक रोजगार बढ़ाएगी या काम का स्वरूप बदलेगी?
  • सूचना की बाढ़ में सही-गलत का निर्णय कैसे होगा?
  • स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी में संतुलन कैसे बनेगा?
  • भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद कैसे हो?

मुख्य सत्र

  • 18 सितंबर : धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व
  • 19 सितंबर : ऋषि एवं कृषि संस्कृति के मध्य भारत का आजीविका विचार
  • प्रश्नोत्तरी : सूचना एवं विचार का संघर्ष; मनुष्य निर्माण में आस्था का महत्व तथा धर्मस्थलों की भूमिका