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वर्चस्व की लड़ाई में हार गया खितौली का 'पुजारी', लंबे समय से बनाए हुए था अपना दबदबा, दहाड़ ऐसी जो पहचान बन गई

जंगल के जानकारों और स्थानीय गाइडों के बीच मशहूर यह बाघ अपने इलाके में लगातार सक्रिय रहने और पर्यटकों को अक्सर दिखाई देने के कारण खास पहचान बना चुका था...और पढ़ें

By SanjayKumar SharmaEdited By: manoj dubey
Publish Date: Tue, 12 May 2026 07:33:13 PM (IST)Updated Date: Tue, 12 May 2026 07:37:13 PM (IST)
वर्चस्व की लड़ाई में हार गया खितौली का 'पुजारी', लंबे समय से बनाए हुए था अपना दबदबा, दहाड़ ऐसी जो पहचान बन गई
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बाघ पुजारी की मौत।

HighLights

  1. खितौली क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए हुए था
  2. शक्तिशाली बाघ डीएम से हुआ सामना
  3. गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हुई

नईदुनिया प्रतिनि​धि, उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खितौली परिक्षेत्र में वर्षों तक अपनी दहाड़ और सक्रियता के लिए पहचान रखने वाला बाघ “पुजारी” आखिरकार जंगल की उसी लड़ाई में हार गया, जिसमें हर दिन अस्तित्व की परीक्षा होती है।

जंगल के जानकारों और स्थानीय गाइडों के बीच मशहूर यह बाघ अपने इलाके में लगातार सक्रिय रहने और पर्यटकों को अक्सर दिखाई देने के कारण खास पहचान बना चुका था।

खितौली क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए हुए था

“पुजारी” लंबे समय से खितौली क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए हुए था। उम्र बढ़ने के साथ उसके सामने नए और ताकतवर युवा बाघों की चुनौती बढ़ने लगी थी। जंगल में क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच संघर्ष सामान्य माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से खितौली क्षेत्र में बाघों की गतिविधियां बढ़ने से टकराव की स्थिति लगातार बन रही थी।

वर्चस्व की लड़ाई में गई जान

वनकर्मियों के अनुसार, हाल के दिनों में पुजारी का सामना एक दूसरे शक्तिशाली बाघ डीएम से हुआ। दोनों के बीच क्षेत्र पर कब्जे को लेकर भीषण संघर्ष हुआ, जिसमें पुजारी गंभीर रूप से घायल हो गया। बाघों की लड़ाई अक्सर बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि वे अपने इलाके और शिकार पर अधिकार बनाए रखने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करते हैं।


घायल होने के बाद पुजारी की हालत बिगड़ती चली गई और उसने दम तोड़ दिया। माना जा रहा है कि गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हुई।

जंगल का जीवन कठिन और संघर्षपूर्ण

पुजारी केवल एक बाघ नहीं था, बल्कि बांधवगढ़ आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका था। उसकी गतिविधियों और संघर्षों की कहानियां अक्सर सफारी गाइडों की जुबान पर रहती थीं। उसकी मौत ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि जंगल का जीवन जितना शानदार दिखाई देता है, उतना ही कठिन और संघर्षपूर्ण भी होता है।

वन विभाग अब पूरे मामले की निगरानी कर रहा है और क्षेत्र में अन्य बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुजारी की मौत ने खितौली क्षेत्र में बाघों के बढ़ते दबाव और क्षेत्रीय संघर्ष की गंभीरता को भी सामने ला दिया है।

शक्तिशाली बाघ डीएम से हुआ सामना

वनकर्मियों के अनुसार, हाल के दिनों में पुजारी का सामना एक दूसरे शक्तिशाली बाघ डीएम से हुआ। दोनों के बीच क्षेत्र पर कब्जे को लेकर भीषण संघर्ष हुआ, जिसमें पुजारी गंभीर रूप से घायल हो गया। बाघों की लड़ाई अक्सर बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि वे अपने इलाके और शिकार पर अधिकार बनाए रखने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करते हैं।

घायल होने के बाद पुजारी की हालत बिगड़ती चली गई और उसने दम तोड़ दिया। माना जा रहा है कि गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हुई।

अब दुलहरा में बाघ का हमला, घायल शहडोल रेफर

बांधवगढ़ में फिर एक बार फिर बाघ ने हमला करके एक युवक को घायल कर दिया। इस घटना में मानपुर परिक्षेत्र से सटे दुलहरा गांव के धर्मेंद्र पिता बाबूवा बैगा उम्र 32 वर्ष गम्भीर रूप से घायल हो गया है। खबर है कि इस हमले में घायल युवक के सर व पैर गम्भीर रूप से चोटिल हुए है।

घटना के बाद घायल युवक को मानपुर अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार कर घायल को 108 की मदद से शहडोल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। घायल धर्मेंद्र बैगा सुबह 05 बजे करीब गांव से सटे सिद्ध बाबा ज्वालामुखी मंदिर गए थे। इसी बीच झाड़ियों में छिपे बाघ ने दहाड़ मरते हुए हमला कर दिया।

यह भी पढ़ें- भोपाल के सूखी सेवनिया में बाघ का आतंक, 15 दिनों से दहशत में 7 गांव, अब तक आधा दर्जन मवेशियों का किया शिकार

इस घटना के बाद ग्रामीणों ने शोरगुल किया, जिसके बाद बाघ जंगल की ओर भाग गया। इस बीच बाघ ने धर्मेंद्र बैगा को लहूलुहान कर दिया। वन्य प्राणियों के लगातार हो रहे बाघों के हमलों से वन क्षेत्र से सटे गांवों में काफी दहशत है। पार्क टीम को ऐसे चिन्हित स्थलों पर गश्ती पर और ज्यादा फोकस करने की ज़रूरत है।