
नईदुनिया प्रतिनिधि, उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के खितौली परिक्षेत्र में वर्षों तक अपनी दहाड़ और सक्रियता के लिए पहचान रखने वाला बाघ “पुजारी” आखिरकार जंगल की उसी लड़ाई में हार गया, जिसमें हर दिन अस्तित्व की परीक्षा होती है।
जंगल के जानकारों और स्थानीय गाइडों के बीच मशहूर यह बाघ अपने इलाके में लगातार सक्रिय रहने और पर्यटकों को अक्सर दिखाई देने के कारण खास पहचान बना चुका था।
“पुजारी” लंबे समय से खितौली क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए हुए था। उम्र बढ़ने के साथ उसके सामने नए और ताकतवर युवा बाघों की चुनौती बढ़ने लगी थी। जंगल में क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच संघर्ष सामान्य माना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से खितौली क्षेत्र में बाघों की गतिविधियां बढ़ने से टकराव की स्थिति लगातार बन रही थी।
वनकर्मियों के अनुसार, हाल के दिनों में पुजारी का सामना एक दूसरे शक्तिशाली बाघ डीएम से हुआ। दोनों के बीच क्षेत्र पर कब्जे को लेकर भीषण संघर्ष हुआ, जिसमें पुजारी गंभीर रूप से घायल हो गया। बाघों की लड़ाई अक्सर बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि वे अपने इलाके और शिकार पर अधिकार बनाए रखने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करते हैं।
घायल होने के बाद पुजारी की हालत बिगड़ती चली गई और उसने दम तोड़ दिया। माना जा रहा है कि गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हुई।
पुजारी केवल एक बाघ नहीं था, बल्कि बांधवगढ़ आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका था। उसकी गतिविधियों और संघर्षों की कहानियां अक्सर सफारी गाइडों की जुबान पर रहती थीं। उसकी मौत ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि जंगल का जीवन जितना शानदार दिखाई देता है, उतना ही कठिन और संघर्षपूर्ण भी होता है।
वन विभाग अब पूरे मामले की निगरानी कर रहा है और क्षेत्र में अन्य बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पुजारी की मौत ने खितौली क्षेत्र में बाघों के बढ़ते दबाव और क्षेत्रीय संघर्ष की गंभीरता को भी सामने ला दिया है।
वनकर्मियों के अनुसार, हाल के दिनों में पुजारी का सामना एक दूसरे शक्तिशाली बाघ डीएम से हुआ। दोनों के बीच क्षेत्र पर कब्जे को लेकर भीषण संघर्ष हुआ, जिसमें पुजारी गंभीर रूप से घायल हो गया। बाघों की लड़ाई अक्सर बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि वे अपने इलाके और शिकार पर अधिकार बनाए रखने के लिए आखिरी दम तक संघर्ष करते हैं।
घायल होने के बाद पुजारी की हालत बिगड़ती चली गई और उसने दम तोड़ दिया। माना जा रहा है कि गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हुई।
बांधवगढ़ में फिर एक बार फिर बाघ ने हमला करके एक युवक को घायल कर दिया। इस घटना में मानपुर परिक्षेत्र से सटे दुलहरा गांव के धर्मेंद्र पिता बाबूवा बैगा उम्र 32 वर्ष गम्भीर रूप से घायल हो गया है। खबर है कि इस हमले में घायल युवक के सर व पैर गम्भीर रूप से चोटिल हुए है।
घटना के बाद घायल युवक को मानपुर अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार कर घायल को 108 की मदद से शहडोल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। घायल धर्मेंद्र बैगा सुबह 05 बजे करीब गांव से सटे सिद्ध बाबा ज्वालामुखी मंदिर गए थे। इसी बीच झाड़ियों में छिपे बाघ ने दहाड़ मरते हुए हमला कर दिया।
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इस घटना के बाद ग्रामीणों ने शोरगुल किया, जिसके बाद बाघ जंगल की ओर भाग गया। इस बीच बाघ ने धर्मेंद्र बैगा को लहूलुहान कर दिया। वन्य प्राणियों के लगातार हो रहे बाघों के हमलों से वन क्षेत्र से सटे गांवों में काफी दहशत है। पार्क टीम को ऐसे चिन्हित स्थलों पर गश्ती पर और ज्यादा फोकस करने की ज़रूरत है।