
Umaria News : संजय कुमार शर्मा, उमरिया, नई दुनिया प्रतिनिधि। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाए जाने के लिए कान्हा के बारहसिंघा को हाथ नहीं लगाया जाएगा और ना ही उन्हें ट्रैंक्यूलाइज किया जाएगा। बल्कि कान्हा के बारहसिंघा की बोमा कैप्चरिंग की जाएगी। प्रोजक्ट बारहसिंघा के तहत कान्हा से बांधवगढ़ 50 बारहसिंघा लाए जा रहे हैं। 26 मार्च को बारहसिंघा को बोमा कैप्चरिंग तकनीक लाया जाएगा। बारहसिंघा को कान्हा से बांधवगढ़ लाने का सफर भोर से पहले शुरू हो जाएगा और 11 बजे के पहले उन्हें बांधवगढ़ के परासी गेट के पास पहुंचा दिया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
ऐसे होगी बोमा कैप्चरिंग
हिरण और बारहसिंघा बेहद नाजुक वन्य प्राणी होते हैं जिन्हें पकड़ना या टैंक्यूलाइज करना खतरे से खाली नहीं होता। यही कारण है कि उन्हें बिना हाथ लगाए और बेहोश किए कैप्चर करने का प्रयास किया जाता है। इसके लिए वाई के आकार का एक आपारदर्शी बाड़ा तैयार किया जाता है जिसका एक हिस्सा काफी चौड़ा और सामने से खुला होता है जबकि दूसरा हिस्सा पतली गली सा होता है। पतली गली वाले हिस्से के मुहाने पर उस वाहन को लगा दिया जाता है जिसमें बारहसिंघा परिवहन किए जाने हैं। बाड़े के चौड़े वाले खुले हिस्से से बारहसिंघा अंदर प्रवेश कर जाते हैं और फिर उन्हें हांककर पतली गली वाले हिस्से की तरफ ले जाया जाता है, जिसके मुहाने पर खड़े वाहन में बारहसिंघा सवार हो जाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मानक की तकनीक
हिरण और बारहसिंघा जैसे वन्य प्राणियों की कैप्चरिंग के लिए बोमा तकनीक दरअसल अंतर्राष्ट्रीय स्तर की तकनीक है। बोमा कैप्चरिंग की इस स्थानान्तरण तकनीकी को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने अनुमोदित किया है। इस तकनीकी में वन्यजीव को ना तो हैंड हैंडलिंग की जाती है और ना ही ट्रैंक्यूलाइज किया जाता है। वन्यजीव को सिर्फ कैप्चर कर एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता है। इससे उन्हें किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं होता। जबकि हाथ लगाने और बेहोश करने की प्रक्रिया की वजह से उनकी जान जाने का खतरा बना रहता है।
नहीं किया जात प्रयास
बारहसिंघा को कैप्चर करने के लिए बोमा के अंदर ले जाने का कोई प्रयास नहीं किया जाता। दरअसल इस तरह के ऑपरेशन के लिए लंबे समय से तैयारी की जाती है। जंगल के ऐसे हिस्से में काफी पहले से बोमा तैयार कर लिया जाता है जहां शकाहारी वन्य प्राणियों का समूह पाया जाता है। यह जानवर खुद-ब-खुद घास चरते हुए बोमा के अंदर पहुंच जाते हैं। शिफि्टग योग्य संख्या में जानवरों के बोमा के अंदर पहुंचते ही उसके दोनो मुहानों को बंद कर दिया जाता है। शिफि्टंग के दौरान संकरे वाले मुहाने पर वाहन लगाकर वन्य प्राणियों को हांका जाता है जिससे वे वाहन में चढ़ जाते हैं।
इनका कहना है
कान्हा के बारहसिंघा को बोमा के माध्यम से कैप्चर किया जाएगा। उसके बाद उन्हें बांधवगढ़ लाया जाएगा। यहां उन्हें एक सुरिक्षत बाड़े में रखा जाएगा।
लवित भारती, डीडी बीटीआर