
संजय कुमार शर्मा/नईदुनिया, उमरिया/ मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व में अप्रैल से अक्टूबर 2026 तक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की लगातार मौत के बाद अब जरूरी हो गया है कि इस संक्रमण के स्रोत को जंगल के अंदर ही तलाशा जाए। विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि आसपास के गांवों के कुत्तों के वैक्सीनेशन और उन्हें बूस्टर डोज देने के बाद भी संक्रमण से एक और बाघिन की मौत हुई। इसकी वजह से जंगल के अंदर ही संक्रमण का स्रोत होने की आशंका है।
21 अप्रैल को कान्हा के सरही में पहले बाघ शावक की मौत के बाद वायरस के संभावित प्रसार को रोकने के लिए टाइगर रिजर्व से लगे 167 गांवों में करीब तीन हजार आवारा कुत्तों का टीकाकरण कराया गया। एक महीने बाद उन्हें बूस्टर खुराक भी दी गई। इस तरह अगले तीन महीनों के अंदर संक्रमण के फैलाव के सारे दरवाजे बंद कर दिए गए।
इसके बावजूद छह अक्टूबर को इसी वायरस से एक और बाघिन की मौत हो गई। इससे यह आशंका उत्पन्न हो रही है कि वायरस जंगल के अंदर ही पैदा हो रहा है। बता दें कि कान्हा टाइगर रिजर्व में अप्रैल से अक्टूबर तक आठ बाघों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक वर्ष से कम आयु के चार शावक शामिल हैं।
केनाइन डिस्टेंपर वायरस भले ही आवारा कुत्तों से फैलता है, पर कान्हा के जंगल में रहने वाले छोटे मांसाहारी प्राणी भी इस संक्रमण के संवाहक हो सकते हैं। इसलिए इन वन्यप्राणियों की जांच कर संक्रमण के संभावित स्रोत का पता लगाना जरूरी है। डॉ. अवध बिहारी श्रीवास्तव का कहना है कि इसका पता लगाने के लिए जंगल के अंदर विशेष अनुसंधान आवश्यक है।
अप्रैल में जिस क्षेत्र में बाघिन और उसके चार शावकों की मौत हुई थी, वहां करीब 50 बाघ सक्रिय हैं। इसी क्षेत्र में संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा है। हालांकि यहां के बाघों की सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आई है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इस क्षेत्र के छोटे मांसाहारी वन्यप्राणियों की जांच पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी समझते हैं।
इस मामले में एक खास बात यह भी है कि जिस बाघिन की छह अक्टूबर को केनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत हुई, उसका कोई रिकॉर्ड कान्हा टाइगर रिजर्व के पास नहीं है। बताया जा रहा कि यह बाघिन बालाघाट की दिशा से यहां पहुंची थी, जिसे रोगग्रस्त पाया गया था।
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जंगल के आसपास के गांवों मे कुत्तों का वैक्सीनेशन कराया जा चुका है। उन्हें बूस्टर डोज भी दी गई है। सरही में सक्रिय अनेक बाघों की जांच भी कराई गई है, जिनमें संक्रमण नहीं पाया गया। छह अक्टूबर को मृत बाघिन बालाघाट की दिशा से यहां पहुंची थी, और इसे रोगग्रस्त ही पाया गया था।- पीके वर्मा, डीडी-केटीआर।