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एक नर और 5 मादा गौर को सुरक्षित छोड़ा, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथी के बाद सबसे ताकतवार जानवर

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए छह भारतीय गौर को बांधवगढ़ में सुरक्षित छोड़ा गया। अब तक कुल 19 गौर यहां पुनर्स्थापित हो चुके हैं। अगले कुछ दिनों में आठ...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 25 Jan 2026 11:41:18 AM (IST)Updated Date: Sun, 25 Jan 2026 12:17:15 PM (IST)
एक नर और 5 मादा गौर को सुरक्षित छोड़ा, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथी के बाद सबसे ताकतवार जानवर
गौर को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया।

उमरिया, नईदुनिया प्रतिनिधि। भारतीय गौर पुनर्स्थापना एवं ट्रांसलोकेशन कार्यक्रम के तीसरे दिन दिनांक 25 जनवरी को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 01 नर एवं 05 मादा गौर को लाकर सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया।

इस प्रकार दिनांक 22 जनवरी से प्रारंभ इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक कुल 19 भारतीय गौर को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किया जा चुका है। आगामी दो से तीन दिनों में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 8 और गौर बांधवगढ़ लाए जाने की योजना है। वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भारतीय गौर का सफलतापूर्वक पुनर्स्थापन किया जा रहा है।

हाथी के बाद सबसे बड़ा शाकाहारी वन्यप्राणी

भारतीय गौर, हाथी के बाद बांधवगढ़ का सबसे बड़ा शाकाहारी वन्यप्राणी है। पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खुरदुरी घास का सेवन करता है, जिसे हिरण एवं मृग जैसे छोटे शाकाहारी प्राणी नहीं खाते।

माना जाता है कि 1990 के दशक तक बांधवगढ़ के गौर आहार की खोज में अमरकंटक के जंगलों तक आवागमन करते थे, परंतु बाद में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से अमरकंटक वन क्षेत्र के कॉरिडोर के बीच में सड़क, रेलवे लाइन, विद्युत वितरण लाइन तथा अन्य कारणों से गौर का सीजनल माइग्रेशन प्रभावित हुआ और अंततः वर्ष 1998 में बांधवगढ़ से गौर पूर्णतः समाप्त हो गए।


फिर बनी कार्ययोजना

गौर उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में बांधवगढ़ क्षेत्र से भारतीय गौर विलुप्त हो गए थे। इसके पश्चात मध्य प्रदेश वन विभाग एवं वन्यजीव संस्थान, भारत के संयुक्त तत्वावधान में वर्ष 2010- 11 से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत कान्हा टाइगर रिजर्व से 50 गौर यहां लाए गए। वर्तमान में आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के उद्देश्य से सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से भी 50 गौर लाए जा रहे हैं, जिनमें से 22 गौर पिछले वर्ष फरवरी माह में लाए जा चुके हैं।